संघ ने कहा है हिन्दू का मतलब गाँधी नहीं हिन्दू का मतलब चाणक्य, शिवाजी, राणा सांगा और परशुराम भी है।
ये वरुण वो ही है जिसने एक बार संघ सभा मैं ध्वज प्रणाम करने पर हाथ नहीं उठाया था जब इसी दो पैसे की मीडिया ने इस को गाँधी परिवार के संस्कार कहा था। परन्तु अब इस को संघ विचारधारा कह रही है. मीडिया के जानकारी के लिया बता दू न तो पहेला वाला सच था और न अब ही है. संघ इस नोटंकी मैं नहीं , नहीं तो प्रथम सरसंघ चालक स्वम्भू बन जाते. परन्तु इस रंगीन बकरी मीडिया को इस बात मैं कोई रूचि नहीं है. रूचि है तो कोई अदाकार गरभवती हुई है की नहीं, अमिताब ने आज दाढ़ी बने है की नहीं, शाहरुख़ ने सलमान को कितनी नीचता से कुता कहा. इसकी तो रूचि इसी मैं है।
एसा भी नहीं वरुण ने कोई नई बात कह दी हो हमारे आदित्य नाथ, बाला साहिब तो कह ते ही रहते है. हा गाँधी परिवार मैं नपुंसकता की परम्परा तोड़ने वाला कोई वीर निकला तो वो वरुण ही है.
और नापुंसको की जमात को येही पसंद नहीं आया. क्योंकि अपनी नपुंसकता छुपानेको गाँधी का असारा ही तो मिलता है. और इसी प्रकार यदि गाँधी परिवार मैं वीर्यवान लोग पैदा होने लगे तो नापुंसको का क्या होगा. बस बस यही एक मात्र चिंता का कारण है जो इस बचारे वरुण को पानी पी पी कर कोस रहे है. कुछ लोगो ने तो इनको सेरे आम फँसी पर चडाने की गुजारिश की है. जितने भी नपुंसक अपनी नपुंसकता को गाँधी का चोल उढा रखे थे अब तो नपुंसकता के साथ साथ नंगापन भी दिखने का खतरा होगया है. इसी कारण से लोग इस वरुण के पीछे है और देखिया जिसकी माँ कुते, बन्दर, और न जाने क्या क्या बचाती फिरती है और मीडिया उसकी इस बात के लिया थर्ड पेज बुक रखती है. मीडिया मैं जय जय कार होती है अब उसीके बेटे नई हिन्दू नामक विलुप्त होती प्रजाति को बचने के लिए कहा तो भैंस की तरफ लठ ले लिया।