Tuesday, April 14, 2009
वरुण के जेल में जाने का राज
Friday, April 10, 2009
मुर्ख बीजेपी ?
Monday, April 6, 2009
क्या हिन्दू की सर्वश्रेष्ठता दुनिया मान चुकी?
इसिलिया मित्रो बुरा समय गया और अच्छा समय बस आनेवाला हैं। देख नहीं रहे अपने बुरे समय मैं लालू भी वरुण पर बुलडोज़र चलने की बात करता हैं। कोई उसे समझाओ के उस प्रकार की राजनीति का समय गया। अब तो कृष्ण ने कंस का वध ही कर दिया।
Thursday, April 2, 2009
हिन्दू क्यों सर्वश्रेष्ठ?
- हिन्दुओ की शाररिक, सामाजिक और धार्मिक स्वछता: - इस विषय का अर्थ कदापि नहीं की मैं हिन्दुओ को बाटने का काम कर रहा हु। मैं तो एतिहासिक पहेलुओ पर गोर कर रहा हूँ। हिन्दू की इसी स्वछता के कारण दलित शब्द का इस्तेमाल हुआ. इसी कारण से मुस्लिम जिनके पूर्वज हिन्दू थे वापस हिन्दू धर्म मैं नहीं आ पा रहे हैं. इसी स्वछता की हम सही रूप मैं परिभाषित नहीं कर पाए या कहे की बदलते वक्त के साथ इस को ढंग से लागु नहीं कर पाए. इसी का कारण था यवनों या अंग्रेजो ने भारतवर्ष पर शासन किया. और चार वर्गों मैं से सबसे निचला परतु महेत्व्पूर्ण अंग को 'दलित' के रूप मैं प्रभाषित किया. येह तो इसी प्रकार से था की शारीर मैं पैर तो हैं निचे परन्तु हैं तो अति म्हेत्व्पूर्ण भाग. हा आज तो इस पर राजनीती हैं सो मुश्किल हैं इस को अभी ठीक करना. मुस्लिम जिसे पूर्व मैं मलेछ शब्द भी कहा गया हैं को धार्मिक स्वछता की वेजहे से अलग रखा गया हैं. जो की सही भी था और ,हैं क्योंकि उनलोगों की धर्म (पंथ) संस्थ्पना हिन्दुओ के विपरीत ही जानबूझ कर की गई थी। और इसी स्वछता के कारण हिन्दू ने कभी भी अपने धर्मं का विस्तार नहीं किया.
- हिन्दुओ मैं कबीलाई संस्कृति का न होना :- येह भी एक विचार हिन्दू संस्कृति मैं हैं की हम कबीले बना कर कभी नहीं रहे हा सयुक्त परिवार एक अलग धारणा थी परन्तु कबीले की तेरह हिन्दू कभी नहीं रहा. उसी कर परिणाम है के आजकल एक सामान सहिता लागु करने मैं दिकत हैं। क्योंकि अपने यहअ तो कोस कोस पर पानी और वाणी बदलना था। कोई अरब और वैटिकन का पैसा तो है नही जो एक जैसे भेडो की तेरहे तनखा पर काम करते दिखे। और परिणाम सवरूप मुस्लिम और कोमुनिस्ट इस बात को हिन्दुओ के विरुद्ध इस्तेमाल करते हैं। परन्तु हिन्दू निर्भीक, स्वतंत्र और परम्परा का पालन करते हुए रहा हैं.
- हिन्दू सहनशील है :- कई लोग हिन्दुओ के सहनशीलता पर भी प्रशन चिन्ह लगते हैं. मैं भी हिन्दुओ की सहनशीलता गलत मानता हु. परन्तु बात सहनशीलता के सही रूप मैं परिभाषित करने की हैं. यदि अहिंसा की परिभाषा गाँधी से लोगे तो गलत ही होगा. क्या शिवाजी, गुरु गोबिंद सिंह सहनशील नहीं थे. हा थे. अरे हम हिन्दुओ का तो पेड़ से फल तोड़ना भी वर्जित था सिर्फ धरती पर पड़े पके फल ही हम खाते थे. तो एअसे भारत मैं कोई हमे सहनशीलता का पाठ पढाए वेह तो गलत ही हैं. परन्तु गाँधी की अहिंसा गलत थी उसका पालन गलत है वो अहिंसा नहीं नपुंसकता हैं और यह बड़ा अंतर हैं और इसका अर्थ यह भी नहीं के मैं गाँधी का अपमान कर रहा हूँ. मैं सिर्फ गाँधी की अहिंसा को गलत रूप मैं परिभाषित करने के खिलाफ हूँ और इसके भी की गाँधी ही अंहिंसा का पुजारी था और उसी ने इस सिदान्त को बनाया था. क्या चाणक्य सहनशील नहीं थे मैं कहूँगा के सब से बड़े वोही थे. उन होने सहनशीलता से चन्द्रगुप्त का निर्माण कर हिन्दुओ को एक रहने योग्य देश दिया और कई सौ वर्षो तक भारत सुरक्षित, निर्भय और शांत रहा. और दूसरी तरफ गाँधी की अहिंसा है उसके मानने पर दो देशो का हिन्दुओ को बलिदान देना पड़ा, लाखो लोगो को जान देनी पड़ी, लाखो बहनों को इज्जत गवानी पड़ी और उस अहिंसा के देवता गाँधी की पिछले साठ साल मैं सारे देश मैं हिंसा ही हिंसा हैं. तो क्या उसे ठीक माना जाये या चाणक्य ठीक थे. अथ: बहुत सारी बाते हिन्दुओ के संदर्भ मैं गलत और एक दम ठुसी हुई हैं। गाँधी की झूठी अहिंसा मैं हम ने भू भाग तो खोया ही परन्तु करोडो लोगो का खून भी बहाया गया और अभी भी बहाया जा रहा है.
- हिन्दू धरम प्राक्रतिक है :- हिन्दू धरम मैं एक भी चीज़ अप्रकर्तिक नहीं है. क्योंकि मानव सभ्यता मैं हिन्दू ही एक धरम और बाकि सब एक पंथ हैं. और यह पंथ हिन्दू धरम से चिड कर या उसके बारे मैं अज्ञानता से बने हैं।
- स्त्री जाती सबसे ऊपर:- हिन्दू धर्म के ऊपर अज्ञानवश आरोप लगता हैं के हिन्दुओ मैं स्त्री जाती का स्थान उचित नहीं हैं। जो की घोर रूप से गलत आरोप हैं। सर्व्पर्थम तो एसा कदापि नहीं हैं. और यदि आज के सन्दर्भ मैं हैं भी तो येह १००० वर्ष गुलामी और पंथ के समक्ष अपने को मानने के कारण ही हैं. जैसे आप देख ले कही पर पर्दा प्रथा हैं तो अज्ञान और यवनों के कारण ही हैं. जैसे कभी किसी ने देखा हैं रामायण मैं सीता जी और महाभारत मैं किसी स्त्री को पर्दा किया हुए या किसी भगवान् की फोटो मैं पारवती जी को पर्दा करते औए. असल मैं यह न तो हमारी संस्कृति है बस है तो संक्रमण कल की एक कुरीति. दूसरा स्त्री जाती आज कलयुग से ज्यादा स्वतंत्र थी पूर्व मैं, इस कलयुग मैं उसकी स्वतंत्रता कम हैं और यह भी यवनों के कारण। स्त्री कभी भी सजाने की वास्तु नहीं थी वह तो पुरुष की तेरह बराबरी पर थी परन्तु अर्धांग्नी होने पर पति उसके लिय भगवन सामान था। इसी बिंदु को समझने की आवश्यकता हैं।
- एक विलक्षण धर्म :- लाखो वर्षो से हिन्दुओ धर्म हैं यह सब मानते हैं यहाँ तक की जिसने वेदों को गडेरियो के गीत माने उसने भी यही स्वीकारा। परन्तु इसने कभी भी एक देश या एक भू भाग बता दे जहा इसने अपना विस्तार किया हो। हैं न एक विलक्षण और अदभूत सत्य। और यह भी सत्य यदि किसी भी धर्मं का विस्तार हुआ हिंदुस्तान से तो वो बोध धरम ही था। परन्तु आज तक हिंदुस्तान ने इसका भी विरोध नहीं किया। क्या आप अरब या वेटिकन मैं येह सोच सकते भी हो।
- आज भी आधुनिकता और सहनशीलता का सागर:- आधुनिक युग मैं जहा भारत हिन्दुओ का है वहा पर २५% वो लोग सीना चौडा करकर रहेते हैं जिनके बाप दादो ने हिन्दुओ की नस्ली सफाया किया। यूरोप, अमरीका या अरब मैं एसा संभव है क्या। तीनो बड़े देव मथुरा, अयोध्या, काशी मैं बंदी हैं फिर भी कानून और जनादेश की बात हिन्दू करते हैं। अपने ही देश मैं अलाप्संक्यक हो कर हिन्दू रहते हैं। (ऊपर दोनों ही बातो का पूरजोर विरोध मैं तो करता हूँ सतही रूप से ये सहनशीलता के मिसाल लगे परन्तु यह नपुंसकता हैं.) क्योंकि हिन्दुओ को अहिंसा का अर्थ ही स्पष्ट नहीं है. सागर मैं भी लहेरे उठती हैं परन्तु यहाँ एसा नहीं है. शिक्षित हिन्दू :- आप यदि आकडो को देखे पिछले १००० वर्षो से गुलाम रहेने का बाद भी यदि शिक्षा मैं किसी से पीछे हैं तो सिर्फ इसाइओ से। ऊपर लिखित सारी बाते हिन्दुओ की श्रेष्ठ के साथ साथ उसके कायरपन और बुजदिली को भी दर्शाता हैं. मेरे ऊपर लिखी बाते लिखने का अर्थ हैं की हिन्दू सर्व्श्रेसाठ तो है परन्तु आज के परिपक्ष मैं सभी बातो को सही परिपेक्ष मैं परिभाषित करना है. और तभी हिन्दू विश्वगुरु बन पायेगा. ये कलियुग के लिय आवश्यक हैं. क्य्नोंकी जिस प्रकार पुरष माँ, बहेन, स्त्री, बेटी, से अलग अलग रूप मैं बात करता हैं परन्तु होता एक ही है इसी प्रकार कलियुग मैं कुछ बातो को चाणक्य के रूप मैं पारभाशित करनी होगी तभी इन बातो की सार्थकता होगी. नहीं तो तब तक वेदों को गडेरियो के गीत मानकर सुनते रहो को रोक रहा है.
Wednesday, April 1, 2009
मीडिया का देशद्रोह
- अब याद करे एन डी एया की सरकार इस मीडिया ने छदम रूप से (तहलका) दुश्चक्र चलाकर विहू रचना रच कर एक अच्छे खासी चलती सरकार को बदनाम किया गया। उस सरकार को एक जाल मैं फंसा कर बदनाम किया. क्या हुआ उसका परिणाम बस तहलका एक मोहरा बन कर पैसा कमा कर साइड होगया। और आनंद ले रहे यह लोग।
- दूसरा मीडिया ने कंधार कांड मैं सारा वो ही काम किया जिस से सरकार को आतंकवादियों को लाभ मिले। मीडिया ने आतंकवादियो के एजेंट का काम किया। जब तक आतंकवादी अफगानिस्तान नहीं चले गए सरकार पर दबाव बनाये ही रखा। और जब चले गए तब सरकार की एसी की तेसी अब तक कर रही है। और जनता ने सजा भी इनको दे दी चुनाव हरा कर पर एक ही बात पर मीडिया आज तक लाखो बार मुर्दे मुद्दे पर एक हीआदमी को बार बार फंसी दे रही है।
- तीसरा सरकार एन डी एया की जब तक रही तब तक हर रोज संघ, विहिप और बजरंग दल की रोज नई कहानी सिल सिलेवार दिखाई गई।
- चोथा रोजाना सरकार की बखिया उधेडी जाती थी कभी अडवाणी और अटल जी के बीच जंग और कभी ममता समता और जया के बीच। और कुछ नहीं मिला तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू को पैसे लेते टीवी पर दिखाया गया. और कुछ नहीं तो जूदावे जी का स्टिंग ओपरेशन दिखाया। मतलब एन डी अ की सरकार के छह सालो मैं स्टिंग ओप्रशनो की बाड़ आगई थी. मीडिया ने स्टिंग ओप्रशनो के जरिया हर रोज सरकार की बखिया उधेडी रोज झूटे आरोप लगे.
और हम इस को माफ़ करते रहे की चलो विपक्ष की भूमिका मैं इस बार मीडिया है. विपक्ष कमजोर हैं इसलिय जनता के हित मैं मीडिया यह काम कर रही है.परन्तु मैं गलत था.मीडिया सरकार की बुराई नहीं कर रही थी मीडिया तो सोनिया, कोमुनिसटों और विदेशी ताकतों के एजेंट का काम कर रही थी. क्यांकि सरकार जाने के बाद भी सिर्फ और सिर्फ हिन्दू संघटन और बीजेपी ही नज़र आई।
- राहुल गाँधी ने अमठी मैं कांड किया जिसका की अभिषक मनुसिंघवी ने अमरीका मैं ऍफ़ आई आर दर्ज करा रखी है. परन्तु मजाल है अंतरअष्ट्रीया मीडिया के लाख लिखने पर भी पुरे हिंदुस्तान की मीडिया ने एक लाइन भी लिखी हो. बुरे मैं तो छोडो अच्छे मैं भी जीकर नहीं किया. और वरुण गाँधी के बारे मैं रोज २४ मैं से २३ घंटे एक मात्र वरुण गाँधी को लानत भेजना है. क्योंकि विपक्ष मैं हैं, हिन्दू है।
- एक स्टिंग ओपरेशन पिछले पञ्च साल मैं नहीं हुआ। पता नहीं तहलका के जाबांज पत्रकार कहां मर्दानगी दिखा रहे है या बीजेपी की सरकार निश्चित मान कर स्टिंग ओपरेशन की तयारी कर रहे है. तरुण तेज पाल का तेज और तरुनाई अब दोनों ही गायब है. उस समय तो ब्लड प्रेशर भी बढ़ रहा था और जौर्नालिसम की नातिकता पर भी बहुत प्रवचन कर रहा था परन्तु अब इसी नातिकता याद नहीं। इस कांग्रेस शासन मैं कांग्रेस ने मीडिया की भी राजनितिक मुद्दों का तो जिक्र ही नहीं करने दिया। लगता है की इन लोगो के मुह भर दिया गए थे जबी तो इतने बड़े बड़े कांड होते हुए भी कोई लडाई की मीडिया मैं खबर नहीं दी परन्तु बीजेपी के शासन मैं अटल अडवाणी जी की हर रोज नई स्टोरी दिखाई गई चाहे झूठीही क्यो न हो इस मीडिया ने.
- उस बीजेपी की शासन मैं झूटे घोटाले कफ़न घोटाला,
- तहलका कांड रचा गया
- परन्तु इस कांग्रेस सोनिया राज मैं सच्चा वोट नोट कांड हुआ इस्रेअल हतियार घोटाला,
- गेहूं घोटाला,
- रेल घोटाला,
- लालू जमीन घोटाला,
- क्वात्रोची भगाओ कांड,
- सुखराम कांड,
- बी आर टी घोटाला,
- सब्सिडी घोटाला परन्तु मीडिया ने इनकी जानकारी नहीं जनता को दी बस दिखाया तो साँप नागन, भूत प्रेत, ई पि एल का शो
- और फ़िल्मी कलिया ही खिलाती रही।
- सोनिया मनमोहन कृष्ण सुदामा लगते रहे
- राहुल प्रियंका आँखों के दो नूर लगते।
- यु पी एया का झगडा प्यार भरी मनुहार लगती रही।
- कोम्निस्टओ का सरकारछोड़ना प्रियतमा का रूटना लगता रहा।
- लालू की बेटी के साथ पढने वाला अभिषेक (हत्या का संदेह) एक हादसा ही लगा रहा।
- सोनिया त्याग की देवी और अडवाणी इनको फूटी आंख नहीं भाया।
- सरकार कांग्रेस और घटकों की परन्तु स्टिंग ओपरेशन बचारे संजय जोशी का. जो की जनता के लिया बिलकुल अनजान चेहरा (परन्तु मीडिया का तो भाड़े पर काम था )
यह तो बहुत लम्बी फहरिस्त होजयगी।
सवाल यह है की मीडिया कांग्रेस के शासन मैं उठा क्या रही थी -
- अडवाणी का पाकिस्तान मैं जिन्ना पर बयान।
- राजनाथ और अडवाणी का (झूठा ही सही)
- मोदी का जलता गुजरात।
- हिन्दुओ का कंधमाल मैं पर्दर्शन दिखाया परन्तु स्वामी जी की हत्या और इसईओ का हिंसा का तांडव नहीं दिखा
राम सेतु है ही नहीं, अमरनाथ है ही नहीं - बाबु बजरंगी ही देश का कोई बहुत बड़ा नेता है जो उसी के बयान दिखा ते रहे।
- जम्मू पर हिन्दुओ का जलूस अत्याचार बताया गया और श्रीनगर मैं हिंसा का नंगा नाच नहीं दिखा.
- उमा का अडवाणीजी को मीडिया के सामने आरोपित।
ऐसी ही लाखो घटनाओ का जिक्र नहीं था, सरकार ने पांच साल शासन किया है परन्तु सरकार के विरुद्ध एक भी टिप्पणी नहीं किसी भी समाचार पत्र या चैनल मैं. न कोई आन्दोलन। न कोई अभियान। है तो बस कांग्रेस सरकार की चटोकारिता और त्याग की देवी का महिमा मंडन.
हाँ अभी स्टोरी ख़तम नहीं याद रखो यदि बीजेपी की सरकार आगई तो अब आप फिर से नाग नगन और भूत प्रेत और हीरो हेरोइन नहीं देख पायंगे सारी की सारी मीडिया तुंरत राजनीती के केंद्र मैं आकर फिर से आम आदमी के मुद्दे यानि की बीजेपी हिन्दू विरोध उठआयगी जैसे -
- नीतिश और अडवाणी का टकराओ।शरद यादव का अडवाणी से झगडानए संघचालक भगवत जी और सरकार से टकराओ।हिन्दू संघटनओ का मुस्लिमो पर अत्याचार।,बीजेपी का हिन्दू हितों पर जेडीयू से टकराओ।,राजनाथ मोदी और जेटली मैं कल्हे, अडवाणी जी संघ के विरोध मैं बोले।वरुण बीजेपी के लिय भस्मासुर, मोदी की अडवाणी जी से नाराजगी, संघ भारत को कैसे हिन्दू राष्ट्र बना रहा है।,जोशी जी संघ के साथ पर अडवाणी जी से मतभेद)
- तो कुछ कुछ इस प्रकार की ही रिपोर्टिंग माने आप की होगी ही। सोनिया राज मैं पांच साल आपने न्यूज़ चैनल मनोरंजन चैनल बने रहे और अब फिर दोबारा से बीजेपी के सरकार बना लेने से दोबारा राजनेतिक न्यूज़ ही देंगा अच्छा अब फिर आप इनसे कहोगे की इस प्रकार की एक तरफा न्यूज़ ही क्यों दिखा रहे हो तो जवाब देंगे की पहेले आप लोगो की आलोचना करने पर ही तो हम राजनेतिक न्यूज़ दिखा रहे हैं और आप फिर से हम न्यूज़ चनलो की आलोचना कर रहे हो.
तो दोस्तों इस साजिश को समझे और भारत की इस बिकाऊ नाटक अपने पटाक्षेप करे नहीं तो दलाल संस्कृति न केवाल राष्ट्र को बल्कि आपके घर को भी निगल जायगी. बीजेपी की सरकार बन ने पर आप पूरी तरेह से इस नंगे परन्तु सचे नाच को देख सकते है।
परन्तु दुःख के साथ कहना पड़ता है की तबआप नाग नागन और भूत प्रेत की कहानी नहीं देख पाएंगे देखेंगे तो बस हिन्दू परिवार(संघ परिवार) की हर व्यक्तिगत बात अपने ही (सेल्फ मेड) स्टिंग ओपरेशन. तो तैयार रहे स्टिंग ओपरेशन देखने को और मीडिया के वीर फौजियो vir faujio की ललकार को suneneसुनने को जो पिछले पांच सालो अपने नही सुनी थी क्योंकि पुराने पैसे पर पलकर आराम कर रहे थे जो अब तैयार है. यह देशद्रोह नहीं तो क्या है???????????????