Tuesday, June 30, 2009

श्री रामजन्मभूमि मुक्ति (६ दिस. १९९२) के बाद की वो अगली सुबह!!!!!!!!!!!!!!

सर्व प्रथम मक्का मदीना को प्रणाम, उसके बाद येरुशलम के सभी स्थलों को नमस्कार अब मैं अपनी बात की शुरुवात करता हूँआज हिन्दुओ की काली करतूतों की भांडा फोडती रिपोर्ट इस्लाम संगरक्षक हिंदुस्तान के प्रथम परिवार के प्रताप से बने भारत के आदरनिये प्रधानमंत्री को सौपी गईआज बहुत से प्रशन उठेंगे जब इस रिपोर्ट की बेला पर कांग्रेस (सत्ता प्राप्ति के बाद अधिक कांफिडेंट) को कुछ १७ साल पहेली बातें याद आगई तो क्यों मेरे मन में जो हूक उठी है उसे भी बयां किया जाए

याद आगई वो दिसम्बर की सुबह, वो दिसम्बर १९९२ की दुपहर भी मैं भी उस समय १० कक्षा का छात्र था और सारी घटनाय याद आरही हैमैं किसी भी राजनीती से अनिभिज्ञ थाउस सायं (६ दिसम्बर) एक बूढी और अंधी औरत बदहवास भागती मिलीमैंने पूछा माँ कहाँ जा रही हो तो बोली बेटा सुन नही रहे यह घंटो और घड़ीआलो की आवाजनही पता तुझे के रामजी आजाद हो गएमैं बोला क्या हुआ ? तो बोली दुष्टों की लीला समाप्त होगई मन्दिर जा कर प्रसाद चढा रही हूँऔर बदहवास वो किसी नजदीकी मन्दिर के तरफ दौड़ती चली गई

फ़िर मैंने भी शहर में देखा की जो जहाँ था वो वही से भगवान श्री राम की नारे लगा रहा थातो कोई शिवालय में घंटे और घडिया बजा रहा थालोग मन्दिर में दोपहर के दो बजे ही आरती कर रहे थे प्रसाद चढा रहे थेजिसे कुछ नही मिला वो चीनी या गुड चढा रहा थाऔर नही तो बनिया अपनी दुकान से सामान लुटा रहा थालोग एक दुसरे को बधाई दे रहे थेकुछ लोगो की आँखों में से अविरल आंसुओ की निर्मल धारा बह रही थीजो जहाँ खड़ा था वही से जय श्री राम और हर हर महादेव के नारे लगा रहा थापांडे पुजारी की इंतजार करे बिना मन्दिर के कपाट खुल गए थेमन्दिर के पुजारी अपनी धोती को समेटते हुए अग्रणी श्रदलुओ के बीच में अपने को छोटा मान रहे थे मानो कहे रहे हो की हम पीछे क्यों रहे गएबस में, रेल में बैठे हिंदू जये श्री राम के नारे लगा कर एक दुसरे को बधाई दे रहे थे

एक चीज निश्चित रूप से कहे सकता हूँ की यह उस शहर की बात है जिसको की आज के समय मुस्लिमो का उत्तर भारत में गढ़ कहा जाता हैउस शहर में दिसम्बर सायं तक किसी भी प्रकार का कोई भी संदेहे कोई भी घबराहट किसी प्रकार की कोई घटना नही थीमुझे इस प्रकार की शहर में खुशी देख कर ए़सा लगा की मानो मैं इतिहास की किताब में चला गयामुझे लगा की या तो देश की आजादी के समय इस प्रकार कुछ हुआ होगा या फ्रांस में क्रांति होने के बाद कुछ इस प्रकार से ही निश्चित रूप से घटा होगाएक ही समय में सभी लोग एक ही स्वर में जे घोष कर रहे थेवैसे मुझे शौक नही इस बात को कहेने का की उस समय हिंदू को किसी मुस्लिम के प्रति विद्वेष था और किसी मुस्लिम को हिन्दुओ की खुशी के ऊपर क्षोभ और हिन्दुओ की भावनाओ का वो जो जवार था उसमे मुझे लगा की मैं भी किसी इतिहास को अपने सामने बनते देख रहा हूँऔर आने वाली पीढी को बता सकता हु की एक बार हिंदू भी बिना किसी भेद भावः , मान अपमान के, समूह में आत्मीयता के भावः में बहेते हुए अपने को मिटटी और ब्रहम से एक साथ जुडा महेसुस कर रहा था

मुझे याद है वो ग्रहणी जो रोटी का बेलन उठाए सर के पल्लू का ध्यान रखते हुए मोहल्ले में चीनी बाँट रही थी, और वो छोटी सी गुडिया अपने बाप के कंधे पर बैठ कर मन्दिर का घड़ियाल बजा रही थी और उसका बाप मुह में शंख लगा कर असफल शंख बजाने की कोशिश कर रहा था

लोग कंधे से कंधे रगड़ते हुए मन्दिर की तरफ मुह करके प्रार्थनाए कर रहे थेमुझे हँसी भी रही थी और इतना उत्साह देख आँखों में आंसू भी ( अभी भी रहे है उस क्षण को लिखते हुए)। हँसी इसलिए रही थी की यह वो ही लोग है जो १५ अगस्त और २६ जनवरी को १० बजे सो कर उठते हैऔर सरकार की जबरदस्ती से सरकारी कर्यकर्मो में नाक भों सिकोड़ कर शामिल होते हैऔर आज यह लोग स्वप्रेरणा से अपने परिवार के साथ बिना किसी उत्सव, तीज त्यौहार के अपना सर्वस्व लुटाते से प्रतीत हो रहे हैं ए़सा हाल इस शहर का ही नही था हिंदुस्तान के हर शहर का यही हाल थाइस हिंदू उत्साह को किसी संघ ने जगाया था और ही किसी लाल कृष्ण अडवाणी ने और ही यह बीजेपी के वोटर थे और ही किसी मुस्लमान के दुश्मनथे तो केवल शुद्ध अन्तकरण से प्रेरणा लेने वाला विशुद्ध हिंदू जिसको की लगा हिन्दुओ के मर्यादा पुर्सोतम श्री राम अपनी प्रजा के लिए एक बार फ़िर रामराज्य लाने आगयइस हिंदू को लगा की हजारो वर्षो पहेले जिस राम की सीता पर संदेय कर के अपने अरध्ये को उसकी सीता से अलग कर जो अपराध किया था उस अपराध से मुक्त उने का कुछ कुछ भावः था

परन्तु जल्द ही मेरी कल्पनाओ को नजर लग गईभारत के निवर्तमान प्रधानमंत्री ने वही पर मस्जिद बनवाने की घोषणा कर एक धरम विशेष के अन्दर एक चिंगारी धद्कादी की शायद तुम्हारे साथ कुछ ग़लत हुआ हैबस फ़िर क्या था उसकी हिन्दुओ में प्रतिक्रिया भी आगई की श्री राम जन्मभूमि पर अबकी बार कुछ भी कारस्तानी बर्दास्त नही होगी

बस
बाकि सब तो इतिहास है

अब
जब कोई रिपोर्ट आई है तो हिंदू की काली करतूत ही होगी की वो क्यो वामपंथियो का इतिहास नकारता है और नकार कर राम को अयोध्या में बताने का पाप करता हैऔर जब यह पाप किया है तो कोई कोई सजा तो इन संविधान विरोधी, वाम इतिहास विरोधियो को मिलनी ही चाहिय


अब बात करते हैं आज कीजो बात मुझे समझ नही आती की हिंदू यदि अयोध्या, काशी, मथुरा मांग रहा था और है तो क्या ग़लत हैआप मुझे कहेते हो की आपका धरम जिन्दाबाद तो जिंदाबाद है मुझे कोई भी ओब्जेक्शन नही हैमैं तो मक्का मदीना को प्रणाम कर कर ही इस लेख की शुरुवात की हैपरन्तु आप मुझ मेरे धरम को मुर्दाबाद क्यों बोलने और करने के लिए कहे रहे हो।क्यों राम का मन्दिर नही बनने देते और जो बना है राम सेतु उसे तोड़ना चाहते हो। यह कदापि स्वीकार नहीआपका धरम जिंदाबाद है परन्तु मेरा धरम भी जिन्दाबाद हैजो लोग बाबरी ढांचे और राम मन्दिर की तुलना करते है वो हिन्दुओ को हीन, कमजोर और बे-गेरत करते है

आज मैं यदि श्री राम जन्मभूमि की बात करता हूँ तो अपने देश की धरती पर अपने आराध्य जिसका का यहाँ पर अधिपतये था और है और रहेगा। उसकी बात करता हूँमें किसी ऐसे हिंदू राजा की बात नही करता जो श्री लंका गया या थाईलैंड गया और उसने वहा अपनी पूजा के लिए मन्दिर स्थापित कियामैं उस मन्दिर की भी बात नही कर रहा हूँ ही मैं इतिहास में जाकर किसी अरब राष्ट्र से किसी भी हिंदू मन्दिर की भीख मांग रहा हूँ मैं तो बबियान में टूटे मंदिरों के अधिकार की बात भी नही कर रहा हूँमैं बात करता हूँ हिन्दुओ के परम अराध्य देवी देवताओ कीमैं बात करता उन वीर हिंदू साहसी और पराक्रमी राजा भोज और विक्र्मदितिये की जिन्होंने बहुत से आज के देशो में बिना किसी विवाद के सुंदर मंदिरों का निर्माण कराया थाउनको तोड़ दिया गया मैं उनके तो पुनर्स्थापना के लिए लड़ रहा हूँ और ही मुझे किसी देशो को इस बारे में कुछ कहेना

मैं मानता हूँ जो हो चुका वो हो चुका वो उनका देश है वहा पर उनका हक़ है परन्तु अब हिन्दुस्थान में क्या बने और क्या बने यह बांग्लादेश और पाकिस्तान के मुस्लमान निर्णय करेंगे? दिसम्बर १९९२ के बाद कितने मन्दिर बांग्लादेश और पाकिस्तान में नेस्तनाबूद कर दिए गएउन मंदिरों का क्या कसूर था? और इन ही मुसलमानों की आंख और कान खोलते हुए बता दू की हिंदू यदि विद्वेष और सुनोयोजित रूप से यह ढांचा तोड़ता जैसे की बाबरी ढांचे के बाद सारे मुस्लिम देश में हुआ था तो काशी और मथुरा के साथ साथ वो ३० हजार मस्जिदे खतरे में पड़ जाती जो मन्दिर तोड़ कर बनी हैऔर हिंदू यदि प्रतिक्रियावादी होता तो कश्मीर में टूटे उन हजारो मन्दिर का हिसाब इसी देश के मुसलमानों से मांगने की कुव्वत रखता है क्या बाबरी के ढांचे के बाद एक भी मस्जिद खतरे में थी, नही थीपरन्तु उस दिसम्बर के बाद लाखो हिंदू सूली पर चढा दिए गए चाहए वो मुंबई में हो या किसी और देश में, कभी बम ब्लास्ट में तो कभी ट्रेनों में । आज तक उन नेताओ को संविधान का डर दिखा कर मुस्लिम गुंडई पर सवार पार्टी उनके रसूख और प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ कर रही है जिन्होंने हिंदू को हिंदू कहकर गर्व की अनुभूति कराइ

अरे इन नेताओ ने कुछ किया हो या नही इन्होने हिन्दुओ को बता दिया की चाहे शेर भेडो के साथ रह रह कर भेड़ जैसा व्यवहार करने लग जाए परन्तु तुम एक जिन्दा कौम हो जिसको बस एक छत्रपति शिवाजी की आवश्यकता पड़ती ही हैतुम वो कौम हो जिसके पौरुष में अभी जंग नही लगातुम सभ्यता की वो मूर्ति हो जिसको लाख उतेजित करने पर भी सडको पर अनान्यास ही नही उतर जातेतुम अपनी रक्षा करनी बखूबी जानते हो बस अपने पूर्व अवतारों की तरहे पाप का घडा भरने की इंतजार करते होपरन्तु इन सब बातो के बाद भी दुःख उस हिंदू जवार के खोने का हैवो हिंदू दोबारा से बाँट गया परन्तु इसी प्रकार जैसे सूर्य के सामने कुछ समय के लिए बादल आजाते हैंपरन्तु मुझे आशा है की फ़िर से कोई
छत्रिये कुलवंत सिन्हास्नाधिश गो ब्रह्मण पालक श्री मंत छत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी जैसा नेतृत्व जाएगाउस दिन फ़िर से हिंदू कल्कि अवतार बन न्याय करेगा
और येंही था वो श्री राम जन्मभूमि आन्दोलन बाकि सब राजनीती और भांडगिरी हैऔर जो नस्ल इसको नही समझ रही वो जानले की आनेवाली पीढियो में वीर्ये नामक बीज भी समाप्त हो जाएगा परन्तु राम का अस्तित्व अक्षुण बना रहेगा.

Wednesday, June 24, 2009

और यदि आत्मा मरती तो दलाई लामा कब का कोमुनिस्ट हो गया होता !!!!!!!

क्या बँटा भारत हिन्दुओ का नहीं है? इसमे इतिहास यदि किसी एक आदमी को विश्व के १२० करोड़ लोगो का भाग्य विधाता बनाने की रसीद जारी कर सकता है तो वो शख्स जवाहर लाल नेहेरू है। इस व्यक्ति ने हिन्दुओ की किस्मत का फैसला अपनी मर्जी से विशेष रूप का हिन्दू इजाद कर के किया । आज मैं पूछना चाहता हूँ की कौन हिन्दू इस संसार में भारत जैसा सेकुलर होना चाहता है? और क्यों हिन्दुओ को इस सेकुलर शब्द का मोहताज होना ही पड़े। इस छदम पंडित श्री जवाहरलाल नेहेरू के तथाकथित वंशजो से ही पूछलो की क्या कालीकट की उस नौका को जिसमे विदेशी सवार थे को हिंदुस्तान में रहेने की इजाजत आज के इसी संविधान से पूछ कर दी थी? या चाणक्य ने चन्द्र गुप्त को सेलेकुस की बेटी की शादी इन सेकुलरों से ही पूछ कर की थी? अरे यह हिन्दू की थाती थी जिसके बलबूते पर हिन्दू फैसला लेते रहे है।
इसलिए ये लाल पीली किताबवाले वामपंथी और संविधान की ओट में छुपे नापुंसको को हिन्दुओ को सेकुलारिसम की परिभाषा सिखाने की जरुरत नहीं है। हाँ अपनी अधम राजनीती को जारी रखने के लिए इस मानवता की गौरवशाली धरोहर हिन्दू जाति को शर्मिंदा कर सकते हैं। क्या कोई कांग्रेसी मुझे एक उत्तर दे सकता है जब नेहेरू इतना ही बड़ा सेकुलर था तो क्यों अपने नाम के आगे पंडित लगाये घूमता था?
हाँ बात कर रहे थे १९४७ में हिन्दुतान के हिन्दुओ को जबरदस्ती सेकुलर जामा पहनाने की। धर्मनिरपेक्षता शब्द चाहे बाद में संविधान में शामिल किया गया हो परन्तु हिन्दुओ को गिरियाने की शुरुवात तो नेहेरू ने ही कर दी थी। मुझे आज तक समझ नहीं आया की वो करोडो हिन्दू जो अपनी जमीन, अपनी पगड़ी, अपना मान, अपनी इज्जत, अपनी माँ, बेहेन, बेटी, अपना सब कुछ लुटा कर हिंदुस्तान में क्या धर्मनिरपेक्षता की खटाई चाटने आये थे। वो आये थे अपने हिन्दुओ के हिन्दुस्थान में। परन्तु वो यहाँ आते अपनी पीडाओं को हिन्दुओ को बता कर एक ऐसे नए हिन्दुस्थान का निर्माण करते जिस से की हालात भविष्य में कभी भी दुबारा एअसे न बनते जैसे १९४७ में बने थे। परन्तु नेताजी को ठिकाने लगा कर, वीर सावरकर को दोषी बता कर, संघ को कटघरे में खडा कर कर, पाकिस्तान से लुटे पिटे हिन्दुओ को कुछ एक प्लाट दे कर और बाकि बचे हिन्दुस्थान के हिन्दुओ को सेकुलेरिसम का झुनझुना पकडा दिया ।
और लगे गाँधी के नाम पर धडा धड नोट छापने। बस बना कर रख दिया एक धुलधूसरित हिन्दुओ का अजायबघर।
जिसमे आज ६० साल बाद भी हिन्दू ही यह पूछता फिर रहा है की मुसलमानों को आरक्षण क्यों नहीं देदेते। अब चरखे वाले बाबा के इन बंदरो को कौन बताये की जिनके लिए तुम मुझे दीनानाथ बनने के लिए कह रहे हो इन्होने (पूर्वजो) ही तुम्हारे ही माँ बेहेन की इज्जत लुट कर तुम्हारे ही बाप दादों की छाती पर खूंटा गाड़ कर हिन्दुस्थान से अलग अपने रहेने के लिए दो देश १९४७ में ही ले लेलिये हैं।
और जो हिन्दुओ के लिए मिला था उसको नेहेरू - गाँधी परिवार ने चिडियाघर बना दिया।
जहाँ हिंदुस्तान के सुप्रीम कोर्ट को भी कई बार नीचा दिखा चुके यह सरकारी विदूषक । आज सुप्रीम कोर्ट हिन्दुओ को डराने के लिए ही इस्तमाल होता है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने १९९५ में हिन्दू शब्द की वियाख्या की थी और यदि उसका पालन सरकार ने किया होता तो सभी लोग हिन्दुस्थान के आज हिन्दू ही केहेलाते परन्तु फिर धर्म्निर्पेक्षेता की क्या दही जमाई जाती सो सुप्रीम कोर्ट को एक बार फिर धकिया दिया गया और फ़िर सच्चर नाम के विशुद हातमताई अवतरित हुए जिन्होंने अपनी ब्रहम लेखनी से एक बार फिर हिंदुस्तान के हिन्दुओ को अरस्तु और सुकरात की दिव्येद्रष्टि का परमज्ञान दे दिया। अथः एक बार फिर भारत के ही भूभाग पर मुसलमानों को आरक्षण की चिलम देने की सच्चर कमेटी रिपोर्ट पकडा दी ।
अरे जब हमारे मनमोहन सिंह जी ने ही हिन्दुओ को असली ज्ञान दे दिया था की ओ हिन्दुओ सुनलो की हिन्दुस्थान (पाकिस्तान और बांग्लादेश देने के बाद भी) के सभी भौतिक साधनों और संसाधनों पर इसलाम के वारिसों का ही प्रथम अधिकार है.
और हाँ यदि अभौतिक ज्ञान जिसको की तुम आज के युग में ढूंढ़ते फ़िर रहे हो को पहेले अंग्रेजो ने फिर मुसलमानों ने और फिर वामपंथियों ने मिटा दिया पर भी अपना अधिकार जताओगे तो बता दू की उसके लिए हम परम तेजस्वी सुप्रीम कोर्ट के काबिल वकील श्री कपिल सिबल को यह अधिकार देते हैं की यह सरस्वती शिशु मंदिर जैसे संस्थाओ के नाक में भी नकेल डाले फिर देखते हैं उन धार्मिक पुस्तकों को जिसमे राम सेतु को राम का बनाया बताया जाता है। सैम पित्रोदा को ज्ञान आयोग इसीलिए दिया हैं की इन हिन्दुओ के ज्ञान में सही बात ठोस ठोस कर भर दो। बाकि काम अम्बिका सोनी मीडिया में देख ही लेंगी।
अच्छा तो मित्रो बात कर रहा था की हिन्दुओ को बताया जाता है की तुम अपनी औकात में रहो जिन बंधुओ को विश्वाश नहीं होता तो मुझे बता दो की फ्रांस में सरकोजी ने एसा क्या कर दिया जो मुख्यधारा के चार चार बड़े चैनल प्राइम टाइम में मुसलमानों के बुर्के पर गंभीर मंत्रणा करते हुए दिखे। क्या हिन्दुस्थान में गरीबी कम होगी या देश में सभी गरीबी रेखा से ऊपर आगये, या अमरनाथ में हिन्दू तीरथ यात्री मरने बंद होगये, या मानसरोवर में फसे सभी हिन्दू यात्री घर आगये या भारत का एक रुपया ५० डालर के बराबर होगया जो हिंदुस्तान के चैनल मुसलमानों की खुदमुख्तारी की सुपारी लेकर सीधा फ्रांस से टकराने को तैयार होगये। अरे हद तो जब हो गई जब भारत के विदेश मंत्री ने भी फ्रांस से एसा करने पर एतराज जाता दिया। भाई हद होगई एसा अब्दुला तो हिंदुस्तान में ही दिख सकता हैं अब पता नहीं की एक सम्मानित विदेश मंत्री की इस बिजली सी फुर्ती भरे बयान की वज़ह क्या है? वो तो मैं नहीं जानता परन्तु विस्मित जरुर हूँ और फिर ऊपर से येही सरकार मुझे धर्मनिरपेक्षता की शरबती ठंडाई पिलाती है। भाई वाकई ऐसी दोरंगी नीति का तो अमरीका भी कायल हो जाये।
अच्छा बात फ्रांस की तो यार एअसा फ्रांस ने क्या कर दिया जो सौ से ऊपर मुस्लिम देशो के पेरिस में बैठे अम्बेसडर उसको करने से नहीं रोक पाए और हिंदुस्तान की सरकार और न्यूज़ चैनलो ने इस मामले को भारत की अस्मिता का प्रशन बना लिया या फ्रांस जहाँ का फैशन देख देख कर जवान हुए पत्रकार और नेता अब अपने चैनलो को ऍफ़ टीवी का मुकाबले में खडा करने की तयारी कर रहे है? भाई जिन अल्प ज्ञानी टीवी पत्रकारों को पता ही नहीं की सरकोजी किन राष्ट्रवादी वोटो से राष्ट्रपति बना है तो उनका क्या करे जो कार्लो ब्रूनी तक ही अपने ज्ञान के अन्तरंग चक्षु खोलना चाहता हो। अरे भइये यह सरकोजी उन धुरंधर राष्ट्रवादी वोटरों के वोटो से बना राष्ट्रपति है जिसको दोबारा से चुनावो में भी जाना है और फ्रांस के राष्ट्रवाद को भी जिन्दा रखना है। इसलिए उसने एसा किया हमारी तरहे तो हैं नहीं की मंदिर बनाते बनाते अपने हिंदुत्व को ही आज बचाने की नौबत आगई। अरे भैया, राम जी का मंदिर बनाने से शुरुवात हुई थी और आज हद यह होगई की हमे ही बैठे बैठे हिंदुत्व के दर्शन पर स्पष्टीकरण देना पड़ गया। वाकई चौब्बे जी दुबे बनगए। फ्रांस पर यह दोयम दर्जे के राजनीती तो इतना ही साबित करती है की अपनी माँ तो मर गई अँधेरे में और धी (बेटी) का नाम लालटेन।
हो सकता हैं इतना बताने पर कुछ नाम के हिन्दू मेरा विरोध भी करे। भाई हो भी क्यों न सेकुलर सरकार की बाकायदा स्कुलो में शिक्षा ली है तो भइया जी एक और बात बता दो की यह हिन्दुतान में दिल्ली से हरिद्वार जाने वाली ही सड़क क्यों नहीं बनी है। जब की आगरा, अजमेर, जयपुर, चडीगढ़ और माशाअल्लह पुणे मुंबई एक्सप्रेस हाई वे बने इतने साल हो गए। अब कुछ सेकुलर बिरादरी वाले आरोप लगा देंगे अरे देखो हर चीज में हिंदुत्व दीखता है इस हिन्दू बावले को। तो भैया यह आरोप भी स्वीकार है। तो भाई न राम जन्मस्थान पर मस्जिद बनी उसपर बोलू, न मथुरा पर, न काशी पर, न कुतुब्मिनारी मंदिर पर, न आगरा के ताजमहल पर और न उन हजारो मस्जिदों पर जो हिन्दुओ के मंदिरों की छाती पर बनी है। तो भाई देश के वातावरण को शांतिपूर्ण बनाने के भरपूर प्रयास करते हुए न बहराइच में परसों पिटे हिन्दू की, न मेरठ में लुटे हिन्दुओ की (पिछले हफ्ते), न लखनऊ में हत्या हुए हिन्दुओ के नेता की (कल), न बात करता सूरत के बलात्कार की और न ही बात करता हिन्दुओ को बधिया करने के एक तरफा मुस्लमान वोटो की। अरे तो अपनी तो बात कर सकता हूँ तो भइया मुझे कोई यह बता दो की हिन्दुओ के जीवन में हरिद्वार का क्या महत्व है जो देश भर की चार, छ , आठ लेन सड़क तक बन गई परन्तु दिल्ली से हरिद्वार जो की एक मात्र जाने का मार्ग है उसकी चांदनी चौक टाइप संकरी सड़क क्यों है? परसों सोमीअमावस्या थी हरिद्वार से दिल्ली एक गाड़ी से दूसरी गाड़ी में एक इंच भी जगह नहीं थी। तो जो सरकर उर्स के इश्तहार देने के लिए करोडो रूपया अखबारों में खर्च कर रही है वो हरिद्वार के बारे में क्या सोच रही है? क्या इस मांग को करने पर मुझे मीडिया भगवा गुंडा तो नहीं कहेगी या सरकार मुझे हिन्दू आतंकवादी तो नहीं कहेगी भाई डर तो यही लगता हैं पता नहीं किस किस से अपने देश में साँस भी लेने की इजाजत लेनी होगी। भाई यहाँ खाड़ी का पैसा भी नहीं जो कुछ कर लेते हम तो सरकार के ही भरोसे है। सुना है कांग्रेस ने चुनाव से पहेले मुस्लिम बस्तियो में मुस्लमान को सरकारी बैंको के जरिए सात आठ महीनो में ही अरबो रूपये बाँट दिए और हम हैं की अडवाणी की उम्र पर ही नाक भों सिकोड़ रहे है।
अच्छा तो बात कर रहे थे हिन्दुओ के अधिकारों की खैर जो पिछले १००० साल से दुसरे दर्जे की जिंदगी जी रहा है उसे अधिकार देकर क्या चाचा नेहेरू की क्रीज जमी जैकेट में लगे गुलाब को बदबूदार बनाना है। अरे तो भाई यह सावन में कावड का मौसम आने वाला है और मीडिया शिव भक्तो की भक्ति और त्याग तो देखेगी नहीं उनकी मुजबुरी का मजाक बनाया जायेगा। हाँ इसी भक्ति पर कल अजमेर गई कैटरिना कैफ की तारीफों के सभी चैनलो पर कसीदे पड़े गए। तो दिल्ली की सेकुलर सरकार इन २५ लाख कवडियो को इंतजाम तो कर देगी जिस से यह भी अपने शंकर पर जल चढा दे। या इनके जल का भी मजाक उड़ाया जायगा। मीडिया तो उडाती है और धड़ल्ले से इनको देश के कानून व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाती है। जब हजारो वर्षो से हिन्दू जनता हरिद्वार का गंगा जल विभिन् शिव मंदिरों में चढाती है तो क्यों इनके लिए अलग से कोई व्यवस्था होती जिस से ये हिन्दू भी अपनी धार्मिक कार्यविधि निर्बाध रूप से कर सके। अब सोचो एसा ही कोई मुस्लिम कार्यकर्म होता अरे इस बात पर सरकारे तो छोडो संविधान बदल जाते, अपने तो बदल ही जाते यहाँ तक ये विदेशो के भी बदल देते जैसे की फ्रांस के बदलने की कोशिश कर रहे है (जैस की बुर्के जैसे नाहक ही छोटे वाकया पर किया जा रहा है) तो सरकर जी मेरी विनती हैं मेरे सभी नागरिक अधिकार तो आपके ४२ बार खारिज संविधान ने बंधक बना ही दिए (उसकी उलजुलूल सेकुलर लोगो की व्याखा की वेजेह से) अब धार्मिक अधिकार जिनको की पहेले से ही नेस्तनाबूद किया हुआ है तो जो बचा हुआ अनुष्ठान है इसको सुचारू रूप से करने के लिए कृपया हरिद्वार - दिल्ली सड़क को उसकी श्रद्धालु के हिसाब से तवाजो दे कर हिन्दुओ नामक प्राणी को देश के बचे कुचे कोने में साँस लेते रहेने की उन पर कृपया करो। हाँ मुझ से उमीद मत करना (हिंदू होने के नाते) मैं मंदिरों को बहुत दान देता हूँ जिसके ऊपर भी आपका ही कब्जा हैं और जिनसे मैं लाखो की संख्या में मदरसों के लिए कंप्युटर खरीदते और बंटते देख रहा हूँ। इसलिए की यह लोग इनसे कुछ पढ़ कर इस देश में शांति बख्शेंगे।
रही बात हमारी तो इस कम्बखत शांति के लिए ही तो आज हमारी हालत यह होगई की हिन्दुओ के अत्यंत परम धार्मिक स्थल के लिए एक अदद ढंग की सड़क की मांग मुझे करनी पड़ रही है। उस पर भी इस बात पर हलकान हुए जा रहा हूँ की कही कोई मुझे हिंदुत्व से जुड़े मुद्दे उठाने का अपराधी घोषित न कर दे। क्या करू हजूर आत्मा नहीं मानती है इस शारीर को तो आपका कानून बांधे ही हुआ है। और यदि आत्मा मरती तो दलाई लामा कब का कोमुनिस्ट हो गया होता।