Tuesday, April 14, 2009

वरुण के जेल में जाने का राज

आज आपको जानकर बहुत आश्चर्य होगा की कांग्रेस ने किस प्रकार दिल्ली में राजधानी में बैठ कर घोटाला किया हैं. यह बहुत ही सनसनीखेज हैं. आज कल आप यदि टीवी देखते हो तो आपको दिख जायेगा के तेल बचाओ पी सी आर अ का विज्ञापन आ रहा है. आज कल किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी की औकात नहीं विज्ञापन टीवी पर देने की वो भी प्राइम टाइम में वंहा पर कांग्रेस मीडिया विशेषतौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को रिश्वत दे रही है. यह सब होरहा हैं बीजेपी की नाक के नीचे. चुनाव आयोग से तो में उम्मीद करता ही नहीं की वो कांग्रेस की कारगुजारी को नोट करे. और यह कांग्रेस की रिश्वत का ही नतीजा हैं की राहुल जी, प्रियंका जी, सोनिया जी की हर रैली की कवरेज हैं और कांग्रेस के विरुद्ध एक शब्द नहीं है. इसी का नतीजा है के मीडिया ने कांग्रेस से मिलकर वरुण को जेल भिजवाया हैं. इसी एक पी सी आर अ के तेल बचाओ विज्ञापन का नतीजा हैं की मीडिया रिश्वत लेकर कांग्रेस की जय जय कार कर रहा है. और बीजेपी के रणनीतिकार हवा मैं घूम रहे हैं. अरे नाक के नीचे देश के करदताओ का पैसा कांग्रेस अपने चुनाव के नतीजे प्रभावित करने मैं कर रही हैं. अरे इतने का तो इस विज्ञापन ने तेल नहीं बचाया होगा उससे कई हज़ार गुना का पैसा टीवी वालो को रिश्वत के रूप मैं देदिया होगा. उस स्पोंसर वरुण की सीडी चलाने का यह ही राज है. और आप बुद्धिमान लोगो जरा विचार तो करो की यह विज्ञापन इसी समय आ क्यों रहा हैं. वो भी दिन में कई बार और सभी चैनल पर. यह दिल्ली मैं नाक के नीचे बहुत बड़ा घोटाला है. जेटली जी ध्यान दो, बीजेपी ध्यान दो नहीं तो शकुनी अभी भी पासा पलट सकता हैं. कल वोट पड़ेंगी और कांग्रेस ने पहेले चरण में मीडिया को तो कर ही लिया. क्या कोई चुनाव आयोग से या राईट टू इन्फोर्मेशन एक्ट से पता करेगा की कांग्रेस ने इस चुनाव के समय कितने बज़ट के विज्ञापन मीडिया को रिश्वत के तौर पर दिया. अब आप लोग मीडिया से उम्मीद नहीं करना के वो इस पर बोलेगी. घोड़ा घास से यारी करे गा तो खायेगा क्या. वोट डालो, पप्पू मत बनो, एक वोट सब बदल सकता है, जागो - यह सब नारे मीडिया के ढकोसले हैं. अब निर्णय आपके हाथ हैं !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

Friday, April 10, 2009

मुर्ख बीजेपी ?

क्षमा करे एसे शब्द के इस्तेमाल का। परन्तु बड़े दुःख के साथ मुझे बीजेपी के लिया इन शब्दों का इस्तेमाल करना पड़ा हैं। अब आप ही बतायं की बीजेपी का टारगेट हे १७० सीट लेना है इन लोकसभा चुनावो मैं। मुझे समझ नहीं आता की इन सीटो के साथ और नीतिश जैसे पार्टनर के साथ बीजेपी कौनसा राष्ट्रवादी चिंतन स्थापित कर देगी। इसका मतलब यह भी नहीं की मैं बीजेपी के घोषणापत्र या उसकी नीतियो से सहमत नहीं हूँ। मैं हूँ। और विशष रूप से अडवाणी जी और जेटली जी के रणनीतियो से भी, परन्तु यह अधूरी हैं। आज मुझे समझ नहीं आता की वरुण जी जेल मैं सड रहे है उस से यु पी मैं बीजेपी की क्या फायेदा लेलेगी। विनय जी, आदित्य नाथ योगी, मनोहर जोशी जी, ऋतंभरा जी को कुछ बोलने नहीं दिया जा रहा है। आज मान भी लो की अडवाणी जी प्रधानमंत्री बन भी जायंगे तो कोनसा सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी कदम नीतिश जैसे पार्टनर के साथ होते उठालेंगे। पहेले मैं भी नीतिश के कामो की सरहना करता था परन्तु अब तो कांग्रेस की हवा देने से और लालू व पासवान के कमजोर होने से अपने को ही एक मात्र धरमनिर्पेक्षता का मसीहा मान रहा है।
नीतिश का भी में पहेली बार विरोध कर रहा हूँ उसका दुस्सहास देख कर। अरे भाई तेरी हसियत क्या थी तुझे तो बीजेपी ने मुखमत्री बना दिया और तुने दिग्विजय और जॉर्ज जैसे नेता जो बीजेपी से सहानुभूति रखते थे बहार भेज दिया। और मुझे नीतिश बबुआ एक बात तो बताओ की तुम धारा ३७० का क्यों विरोध कर रहे हो हटाने का। तुम्हे क्या कश्मीरी मुस्लमान का वोट चाहिय या कश्मीर मैं कोई उमीदवार खडा कर रखा हैं। ये तो बीजेपी संविधान की ही बात कर रही है और देश हित की। इसमे मुस्लमान तो कही भी नही है।और जो मुस्लमान आपको यहे बिहार में वोटो से तौल रहे हैं उनको तो धार ३७० हटाने से कोई भी फर्क नही पड़ेगा फिर विरोध क्यो। क्योंकि आप बीजेपी के कंधे पर ही बैठ कर बीजेपी को ही नापना चाहते हो और धर्मनिपेक्षता का एक और ढोंग शुरू करना चाहते हो। आपकी जानकारी के लिया बता दू की उस प्रकार के ढकोसले का समय समाप्त हैं और आप समय जाया करके अपने को समाप्त न करे। अबतो आप सिर्फ और सिर्फ लालू जैसे नौटंकी शुरू कर रहे हैं जैसे की रिक्शा पर स्लम डॉग देखने गए थे आप। इसी तरह से राजनीती करेंगे आप?
दूसरा क्या बिहार ने ही देश भर में धरमनिर्पेक्षता का ठेका ले रखा हैं की जिसे देखो बीजेपी को नसीहत देने लगता हैं तमिल नाडू या महाराह्ष्ट्र या किसी और राज्य में तो यह ढकोसला नहीं है फिर बिहार के नेता ही इसको क्यों ढो रहे हैं। बाला साहिब ने तो प्रतिभा पाटिल को वोट देदिया था। नीतिश जी इस बीमारी से जल्दी बहार आजाओ । मुलाम्यम ने तो जन्नत की हकीकत देख ली अब आप भी देख लो। हाँ सच भी तो हैं नया नया मुल्ला अजान जरा जोर से देता हैं। अब बात वापस बीजेपी की जब तक बीजेपी यु पी मैं ३० से ४० सीट कम से कम नहीं जीत लेती बीजेपी की जीत का कोई मायने नहीं है। और यह सीट यु पी जैसे राज्य मैं मायावती और मुलायम जैसे घोर संप्रदायिकता निति और अमर जैसे घाघ के होते संभव नहीं हैं। यदि वरुण जी जैसे नवयुवक जोकि संस्कृतिक राष्ट्रवाद पर आँख खोलो बयान देकर मतदाताओ की आंख खोल सकता था उसे जेल में सडा कर पता नहीं बीजेपी क्या पाना चाहती हैं। उस षड़यंत्र के शिकार व्यक्ति को और अन्य राष्ट्रभक्तों लोगो को जब तक स्वत्रन्त्र होकर नहीं बोलने दिया जायगा तो बीजेपी १७० सीट जीत कर भी नीतिश जी जैसे व्यक्ति के आगे पानी भारती रहेगी। और प्रज्ञा बहेन और वरुण भाई जैसे लोग जेल मैं गीता पढ़ते रहेंगे। १७० सीट से कुछ नहीं होगा। बीजेपी से अनुरोध हैं कृपया समय रहेते रणनीति बदले नहीं तो अगले पांच साल पछताने के आलावा कुछ हाथ नहीं लगे गा। सबसे बड़ा दल बनकर भी कुछ नहीं मिलेगा बल्कि आपके विरुद्ध यह सब सेकुलर दल नीतिश के पीछे खड़े होकर अगले एक या दो साल में सरकार गिराकर (यदि बन गई तो ) आपको धूल चटा देंगे फिर न आप तीन में होंगे न तेरा में। क्योंकि फिर राम मंदिर, ३७० के बिना आप लोगो से वोट मांगने जाओगे तो चिताम्बरम और जिंदल वाला जुता ही मिलेगा। इसलिय दोस्तों जागो। महाभारत में अर्जुन भी अंत मैं जाग गया था कृष्ण के कहेने से यहाँ तो कृष्ण को ही जागना है पूरा भारत जगाने के लिया। खाली गुंजरत और कर्नाटका से सरकार नहीं बन जयागी केन्द्र में । अभी भी समय है जागो और यु पी में विनय जी जैसे राष्ट्रभक्तों को सत्य बोलने दो। नहीं तो कम से कम हम तो वामपंथियों और कांग्रेस की अगले पांच साल सरकार ढ़ोने से रहे । फैसला आपका हैं क्योंकि निर्णायक और मजबूत नेता आप ही हैं। हाँ इंतना जरूर हैं की इस घोर अंधकार मैं बीजेपी ही एक आस है आज। - निवेदक धर्मनिपेक्षता के डंक से पीड़ित भारत देश का एक नागरिक।

Monday, April 6, 2009

क्या हिन्दू की सर्वश्रेष्ठता दुनिया मान चुकी?

जी हाँ यह सत्य है। परन्तु इसका कारण क्या है। इसके लाखो कारण हैं पर सही कुछ इस प्रकार हैं। हिन्दुओ ने रूस के शासन को इन्द्रा और नेहरु के माध्यम से चलाया था।
हिन्दू कभी भी समाजवादी य वामपंथी न रहा और न रेह्सकता। हिन्दू को आप अच्छा माने या बुरा परन्तु सच यह ही है के हिन्दू अच्छा और बुरे कर्म में विश्वाश रखता है। बाइबल और कुरान जो की कुछ हद तक समाजवाद की तरफ इंगित करते हैं और जैसे की में पहेले भी लिख चूका की यह दो नो पंथ हिन्दू धर्म की प्रतिक्रियवश या अज्ञानता वश बने हैं। हिन्दू हमेशा से अच्छा और बुरे कर्म के फल भोगने और देने में विश्वाश करता है। तो जब संसार से रूस के रूप मैं समाजवाद और वामपंथ का युग ख़तम हुआ तो हिन्दू धर्म अपने नेसर्गिक दौर मैं आगया। और नार्सिम्म्हा सरकार का आर्थिक उदारवाद अपनाना कोई आकास्मक घटना नहीं है। यह हिन्दुओ की स्वाभिक शैली है आज अमरीका जो कुछ भी कर रहा हैं वो हिन्दू धरम शैली ही है। हाँ यह जरूर है की समय और स्थान के साथ साथ निति भी बदलती है जो की अमेरिका के हितों को जांचे वोही वह करे। रही बात हिन्दुस्थान की तो हिन्दुओ का समाजवाद में कभी कोई रुझान रहा ही नहीं। तब समाजवाद गया हिंदुस्तान का औसत हिन्दू तरकी करने लगा।
हिन्दू पैसा: आज विश्व मैं हिन्दू और येहुदी ही पैसे वाले है बाकि सब तो परिस्थितिवश बने हैं। न तेल के कुँए होते न अमीर शेख होते, न पिछली शताब्दी में अफ्रीका और एशिया का कच्चा मॉल जाता न यूरोप और अमेरिका आज पैसे वाले होते। परन्तु हिन्दू क्यों पैसे वाला हैं पिछेले १००० वर्षो से गुलाम होने के बाद भी उसपर पैसा है तो कारण क्या? उसे पैसा न तो अमेरिका ने दिया और न रूस के समाजवाद ने फिर क्यों अमीर है वो। क्योंकि उसके पास उसके पूर्वजो की निति है इसिलिया ६० साल के हिंदुस्तान के भीखमंगो के राज में भी उसके पास पैसा हैं। पाकिस्तान और उसके बांग्लादेश में ही स्वतंत्रता के पहेले हिन्दू पैसे वाला था वहा से उनको लात मारकर उसको भिखारी बनाकर मुसलमानों ने भेजा था परन्तु उन होने ही हिंदुस्तान में आकर फिर से दौलत का अम्बार लगा दिया क्यों? उसके पाकिस्तान का कराची उसके लाहौर, बांग्लादेश का सिलेट उसके ढाका व्यापर के बड़े बड़े केंद्र भी भिखमंगो के गड कैसे बन गए आज ? दोस्तों नियत, उसके मेहनत इसका कारण हैं इसके बीच। आज मुसलमानों से पुछो तेल के कुँए सूख जायंगे तो क्या होगा? मैं बताता हूँ फिर से घोडो पर आकर हिंदुस्तान की इज्ज़त लूटी जायेगी उस से उसकी दौलत। तो मित्रो यह तो अपनी नीति ही चलायंगे परन्तु आपका क्या?
दो कौम एक साथ येहुदी उसके हिन्दू: हलाकि इसका अभी कोई भी प्रमाणिक तथ्य नहीं की यह दोनों कौम एक साथ हैं परन्तु कुछ जगह समझदारी को देख कर लगता हैं की यह दोनों कौमे एक साथ आ जायंगी। क्योंकि दोनों ही इसलाम की सताई है। दोनों ही सबसे होशियार और तकनीक पसंद हैं। दोनों में ही कोई भी विरोधाभास नहीं हैं। और आज के युग में दोनों ही एक दुसरे की पूरक हो सकती हैं। हाँ लोग तो यह तक कहते हैं की क्रिस्चेन भी इनके साथ आ सकते हैं। यदि एसा होता हैं तो अपने आप हिन्दुस्थान विश्व गुरु हो जायगा। क्योंकि न येहुदियो के पास और न क्रिस्चेन के पास भौतिकतावाद के बाद का ज्ञान हैं। हैं तो वो बस हिन्दुओ के पास उसके आप मित्रो को पता ही हैं के भौतिकतावाद की एक सीमा होती है उसके बाद बस शांति ही शांति होती हैं। तो स्वामी विवेकानंद ने जो कुछ भी कहा सब सत्य होने वाला हैं। इंतजार करो इस समाजवाद के अंत का। हाँ मैं समाजवाद पर भी अपनी राय प्रकट करना चाहूँगा। आज जो समाजवाद और वामपंत विश्व मैं है वो एक ठुसी हुई सी जद्दोजहद है। हिन्दुओ में समाजवाद नहीं है परन्तु समरसता उसके समानता कही गई है उसके में इसका समर्थक हूँ।
हिन्दू पाक साफ हैं: हिन्दुओ का पाक साफ होना ग्लोबल इकोनोमी में भी लाभ देगा। आज हिन्दू पुरे संसार में जहा भी चला जाये उसका स्वागत ही होगा क्यूंकि उसने संसार के किसी भी कोने मैं कभी भी अत्याचार नहीं किया। न क्रिस्चन, ना मुस्लिम और ना ही यहूदी यह बात नही कह सकते। इन होने समय समय पर किसी न किसी कारण यह सब किया हैं। परन्तु हिन्दुओ ने अपने स्वर्णिम काल मैं भी एसा कोई कुकर्त्य नहीं किया सो हिन्दुओ को सबका मान और सहयोग मिलना ही हैं।
हिन्दुओ का भाग्य किसी एक हाथ मैं बंद नहीं: हिन्दू किसी एक राजा या तानाशाह की बपौती या जागीर नहीं हैं। हिन्दू एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था का पालन करने वाला धरम हैं। सो अपने लोकतान्त्रिक व्यवस्था की वेजहे से उसका तरक्की करना ही हैं। जब उसने तानाशाह राज और समाजवाद की प्रतिकूलता में भी तरक्की की तो फिर अब तो कहेने ही क्या।
पुर्वजनम मैं विश्वाश: यह एक इसी धारणा हैं जो मनुष्य को अँधेरे में भी गलत नहीं करने देती और सही माने तो हिन्दुओ के चरित्र हनन होने से इसी ने रोका है। इस का कहेना यह हैं की भाई जिसका लिया है उसका तो सूद समेत आज नहीं तो कल, इस नहीं तो अगले जनम में देना ही है। अब देखो येदी अमेरिका में इस धारण की मजबूती होती तो मंदी इस संसार मैं आज न होती। सो मित्रो हिन्दुओ का स्वर्णिम युग तो आने वाला हैं और कोई दस बीस सालो में नहीं बस एक दो साल की ही बात है।
जो आज हिंदुस्तान सोचता है कल पूरा विश्व सोचेगा: और यह बात कोई मैं मजाक में नहीं कहे रहा हूँ। इसलाम के अत्याचारों और वामपंत के कुकृत्य को हिंदुस्तान ने कई दशक पहेले बता दिया था इसलिय इसलाम के १००० वर्ष मैं के अत्याचारों के आगे हिन्दुओ न झुका और न इसे माना। रूस के हिंदुस्तान पर हज़ार अहेसन करने या दिखने या डराने या ६० साल शासन के बाद भी हिन्दुओ ने समाजवाद या वामपंत नहीं अपनाया। क्योंकि हमारे खून में यह नहीं था।
इसिलिया मित्रो बुरा समय गया और अच्छा समय बस आनेवाला हैं। देख नहीं रहे अपने बुरे समय मैं लालू भी वरुण पर बुलडोज़र चलने की बात करता हैं। कोई उसे समझाओ के उस प्रकार की राजनीति का समय गया। अब तो कृष्ण ने कंस का वध ही कर दिया।
एक बात समझलो हिन्दुओ के विरोध में राजनीती करने वालो की यह देश तुम्हारे बाप का नहीं है। और न ही तुम ऊपर से लिखा कर लाये की राज करना तुम्हारा अधिकार ही है। वो तो समय एसा था और जो की कुछ बीत गया और कुछ बीत रहा हैं। इस धरती को मेरे बाप दादाओ ने अपने खून से सींचा था ये किसी समाजवादियों, इस्लामियों और गांधियो के लिया नहीं था. मेरे पूर्वज सावरकर जी, गुरु गोबिंद सिंह जी, भगत सिंह जी, राणा सांगा तिल तिल कर अपने आसुओ से इन लोगो के लिया हिन्दुस्थान नहीं देकर गए। इसी धरती पर करूक्षेत्र का युद्ध हुआ था. एक देश माँगा था दो देदिया १९४७ में। परन्तु भारत तो हिन्दू ने अपने ही रहेने के लिया था। और इन पांच गांव रुपी भारत मैं भी मेरे भाई वरुण की छाती पर बुलडोज़र चालाओगे। तो फिर समझो अंत आगया हैं। अब पांच गांव नहीं पुरे भारत (अखंड) पर बात होगी और जिसे यह बात स्वीकार नहीं की भारत हिन्दुओ का नहीं वो १९४७ के अपने बाप दादाओ से पूछे और नहीं तो बाला साहिब ठाकरे एक सीडी लिए हैं उसमे नेहरु की सचाई हैं। उनसे पता करे की mulsalmano को pakistan और bangladesh क्यो मिला था । विश्वाश नहीं होता तो बाला shaib से पुछ ले । यह हैं समाजवादियों, गांधियो, इस्लामियों और वाम्पन्तियो नामक खरपतवार की कटाई की शुरुवात।
और हिन्दुओ के स्वर्णिम भारत का उदय.

Thursday, April 2, 2009

हिन्दू क्यों सर्वश्रेष्ठ?

वाकई क्या हिन्दू सर्वश्रेष्ठ है? मेरा जवाब हां हैं। परन्तु इस चर्चा को छेड़ कर मैं हिटलर नहीं बनना चाहता। इस चर्चा का मतलब यह भी नहीं की मैं नसलवाद को बढावा देना चाहता हूँ. मैं तो केवल अधयात्मवाद का भौतिक संसार मैं विश्लेषण करने की चेष्टा कर रहा हूँ. वैसे तो मेरी बात को सिद्ध करने के लिय विषय बहुत ही बड़ा हैं जो इसमें मैंने अधयात्मवाद का विश्लेषण अधिक किया तो फिर समेटना सम्भव न होगा । अथ: मित्रो मेरा अधिक जोर हिन्दू की भौतिक संसार मैं श्रेष्ठता की चर्चा करकर आपका ध्यान आकर्षित करना है. और आज यह विषय क्यों मौजूं हुआ उसका कारण भारतवर्ष मैं हिन्दू हितों की बात करने वालो को दण्डित किय जाने ने मुझे व्यथित किया.
  • हिन्दुओ की शाररिक, सामाजिक और धार्मिक स्वछता: - इस विषय का अर्थ कदापि नहीं की मैं हिन्दुओ को बाटने का काम कर रहा हु। मैं तो एतिहासिक पहेलुओ पर गोर कर रहा हूँ। हिन्दू की इसी स्वछता के कारण दलित शब्द का इस्तेमाल हुआ. इसी कारण से मुस्लिम जिनके पूर्वज हिन्दू थे वापस हिन्दू धर्म मैं नहीं आ पा रहे हैं. इसी स्वछता की हम सही रूप मैं परिभाषित नहीं कर पाए या कहे की बदलते वक्त के साथ इस को ढंग से लागु नहीं कर पाए. इसी का कारण था यवनों या अंग्रेजो ने भारतवर्ष पर शासन किया. और चार वर्गों मैं से सबसे निचला परतु महेत्व्पूर्ण अंग को 'दलित' के रूप मैं प्रभाषित किया. येह तो इसी प्रकार से था की शारीर मैं पैर तो हैं निचे परन्तु हैं तो अति म्हेत्व्पूर्ण भाग. हा आज तो इस पर राजनीती हैं सो मुश्किल हैं इस को अभी ठीक करना. मुस्लिम जिसे पूर्व मैं मलेछ शब्द भी कहा गया हैं को धार्मिक स्वछता की वेजहे से अलग रखा गया हैं. जो की सही भी था और ,हैं क्योंकि उनलोगों की धर्म (पंथ) संस्थ्पना हिन्दुओ के विपरीत ही जानबूझ कर की गई थी। और इसी स्वछता के कारण हिन्दू ने कभी भी अपने धर्मं का विस्तार नहीं किया.
  • हिन्दुओ मैं कबीलाई संस्कृति का न होना :- येह भी एक विचार हिन्दू संस्कृति मैं हैं की हम कबीले बना कर कभी नहीं रहे हा सयुक्त परिवार एक अलग धारणा थी परन्तु कबीले की तेरह हिन्दू कभी नहीं रहा. उसी कर परिणाम है के आजकल एक सामान सहिता लागु करने मैं दिकत हैं। क्योंकि अपने यहअ तो कोस कोस पर पानी और वाणी बदलना था। कोई अरब और वैटिकन का पैसा तो है नही जो एक जैसे भेडो की तेरहे तनखा पर काम करते दिखे। और परिणाम सवरूप मुस्लिम और कोमुनिस्ट इस बात को हिन्दुओ के विरुद्ध इस्तेमाल करते हैं। परन्तु हिन्दू निर्भीक, स्वतंत्र और परम्परा का पालन करते हुए रहा हैं.
  • हिन्दू सहनशील है :- कई लोग हिन्दुओ के सहनशीलता पर भी प्रशन चिन्ह लगते हैं. मैं भी हिन्दुओ की सहनशीलता गलत मानता हु. परन्तु बात सहनशीलता के सही रूप मैं परिभाषित करने की हैं. यदि अहिंसा की परिभाषा गाँधी से लोगे तो गलत ही होगा. क्या शिवाजी, गुरु गोबिंद सिंह सहनशील नहीं थे. हा थे. अरे हम हिन्दुओ का तो पेड़ से फल तोड़ना भी वर्जित था सिर्फ धरती पर पड़े पके फल ही हम खाते थे. तो एअसे भारत मैं कोई हमे सहनशीलता का पाठ पढाए वेह तो गलत ही हैं. परन्तु गाँधी की अहिंसा गलत थी उसका पालन गलत है वो अहिंसा नहीं नपुंसकता हैं और यह बड़ा अंतर हैं और इसका अर्थ यह भी नहीं के मैं गाँधी का अपमान कर रहा हूँ. मैं सिर्फ गाँधी की अहिंसा को गलत रूप मैं परिभाषित करने के खिलाफ हूँ और इसके भी की गाँधी ही अंहिंसा का पुजारी था और उसी ने इस सिदान्त को बनाया था. क्या चाणक्य सहनशील नहीं थे मैं कहूँगा के सब से बड़े वोही थे. उन होने सहनशीलता से चन्द्रगुप्त का निर्माण कर हिन्दुओ को एक रहने योग्य देश दिया और कई सौ वर्षो तक भारत सुरक्षित, निर्भय और शांत रहा. और दूसरी तरफ गाँधी की अहिंसा है उसके मानने पर दो देशो का हिन्दुओ को बलिदान देना पड़ा, लाखो लोगो को जान देनी पड़ी, लाखो बहनों को इज्जत गवानी पड़ी और उस अहिंसा के देवता गाँधी की पिछले साठ साल मैं सारे देश मैं हिंसा ही हिंसा हैं. तो क्या उसे ठीक माना जाये या चाणक्य ठीक थे. अथ: बहुत सारी बाते हिन्दुओ के संदर्भ मैं गलत और एक दम ठुसी हुई हैंगाँधी की झूठी अहिंसा मैं हम ने भू भाग तो खोया ही परन्तु करोडो लोगो का खून भी बहाया गया और अभी भी बहाया जा रहा है.
  • हिन्दू धरम प्राक्रतिक है :- हिन्दू धरम मैं एक भी चीज़ अप्रकर्तिक नहीं है. क्योंकि मानव सभ्यता मैं हिन्दू ही एक धरम और बाकि सब एक पंथ हैं. और यह पंथ हिन्दू धरम से चिड कर या उसके बारे मैं अज्ञानता से बने हैं।
  • स्त्री जाती सबसे ऊपर:- हिन्दू धर्म के ऊपर अज्ञानवश आरोप लगता हैं के हिन्दुओ मैं स्त्री जाती का स्थान उचित नहीं हैं। जो की घोर रूप से गलत आरोप हैं। सर्व्पर्थम तो एसा कदापि नहीं हैं. और यदि आज के सन्दर्भ मैं हैं भी तो येह १००० वर्ष गुलामी और पंथ के समक्ष अपने को मानने के कारण ही हैं. जैसे आप देख ले कही पर पर्दा प्रथा हैं तो अज्ञान और यवनों के कारण ही हैं. जैसे कभी किसी ने देखा हैं रामायण मैं सीता जी और महाभारत मैं किसी स्त्री को पर्दा किया हुए या किसी भगवान् की फोटो मैं पारवती जी को पर्दा करते औए. असल मैं यह न तो हमारी संस्कृति है बस है तो संक्रमण कल की एक कुरीति. दूसरा स्त्री जाती आज कलयुग से ज्यादा स्वतंत्र थी पूर्व मैं, इस कलयुग मैं उसकी स्वतंत्रता कम हैं और यह भी यवनों के कारण। स्त्री कभी भी सजाने की वास्तु नहीं थी वह तो पुरुष की तेरह बराबरी पर थी परन्तु अर्धांग्नी होने पर पति उसके लिय भगवन सामान था। इसी बिंदु को समझने की आवश्यकता हैं।
  • एक विलक्षण धर्म :- लाखो वर्षो से हिन्दुओ धर्म हैं यह सब मानते हैं यहाँ तक की जिसने वेदों को गडेरियो के गीत माने उसने भी यही स्वीकारा। परन्तु इसने कभी भी एक देश या एक भू भाग बता दे जहा इसने अपना विस्तार किया हो। हैं न एक विलक्षण और अदभूत सत्य। और यह भी सत्य यदि किसी भी धर्मं का विस्तार हुआ हिंदुस्तान से तो वो बोध धरम ही था। परन्तु आज तक हिंदुस्तान ने इसका भी विरोध नहीं किया। क्या आप अरब या वेटिकन मैं येह सोच सकते भी हो।
  • आज भी आधुनिकता और सहनशीलता का सागर:- आधुनिक युग मैं जहा भारत हिन्दुओ का है वहा पर २५% वो लोग सीना चौडा करकर रहेते हैं जिनके बाप दादो ने हिन्दुओ की नस्ली सफाया किया। यूरोप, अमरीका या अरब मैं एसा संभव है क्या। तीनो बड़े देव मथुरा, अयोध्या, काशी मैं बंदी हैं फिर भी कानून और जनादेश की बात हिन्दू करते हैं। अपने ही देश मैं अलाप्संक्यक हो कर हिन्दू रहते हैं। (ऊपर दोनों ही बातो का पूरजोर विरोध मैं तो करता हूँ सतही रूप से ये सहनशीलता के मिसाल लगे परन्तु यह नपुंसकता हैं.) क्योंकि हिन्दुओ को अहिंसा का अर्थ ही स्पष्ट नहीं है. सागर मैं भी लहेरे उठती हैं परन्तु यहाँ एसा नहीं है. शिक्षित हिन्दू :- आप यदि आकडो को देखे पिछले १००० वर्षो से गुलाम रहेने का बाद भी यदि शिक्षा मैं किसी से पीछे हैं तो सिर्फ इसाइओ से। ऊपर लिखित सारी बाते हिन्दुओ की श्रेष्ठ के साथ साथ उसके कायरपन और बुजदिली को भी दर्शाता हैं. मेरे ऊपर लिखी बाते लिखने का अर्थ हैं की हिन्दू सर्व्श्रेसाठ तो है परन्तु आज के परिपक्ष मैं सभी बातो को सही परिपेक्ष मैं परिभाषित करना है. और तभी हिन्दू विश्वगुरु बन पायेगा. ये कलियुग के लिय आवश्यक हैं. क्य्नोंकी जिस प्रकार पुरष माँ, बहेन, स्त्री, बेटी, से अलग अलग रूप मैं बात करता हैं परन्तु होता एक ही है इसी प्रकार कलियुग मैं कुछ बातो को चाणक्य के रूप मैं पारभाशित करनी होगी तभी इन बातो की सार्थकता होगी. नहीं तो तब तक वेदों को गडेरियो के गीत मानकर सुनते रहो को रोक रहा है.

Wednesday, April 1, 2009

मीडिया का देशद्रोह

आज मजबूर होकर मीडिया के बारे मैं लिखने का मन किया। अन्यथा हिन्दुओ पर ही इतने अत्याचार होरहे है की उन्ही को देख देख कर दुःख होता है। परन्तु इस भारतीय मीडिया का हम पर जले पर नमक छिड़कना कतई गवारा नहीं, तभी सोचा इस मीडिया की सचाई भी कहीं उजागर हो रही है या नहीं. इस बिकाऊ मीडिया का इस तरहा का घिनौना रूप देख कर हर कोई दांतों तले ऊँगली दबा ले.
  • अब याद करे एन डी एया की सरकार इस मीडिया ने छदम रूप से (तहलका) दुश्चक्र चलाकर विहू रचना रच कर एक अच्छे खासी चलती सरकार को बदनाम किया गया। उस सरकार को एक जाल मैं फंसा कर बदनाम किया. क्या हुआ उसका परिणाम बस तहलका एक मोहरा बन कर पैसा कमा कर साइड होगया। और आनंद ले रहे यह लोग।
  • दूसरा मीडिया ने कंधार कांड मैं सारा वो ही काम किया जिस से सरकार को आतंकवादियों को लाभ मिले। मीडिया ने आतंकवादियो के एजेंट का काम किया। जब तक आतंकवादी अफगानिस्तान नहीं चले गए सरकार पर दबाव बनाये ही रखा। और जब चले गए तब सरकार की एसी की तेसी अब तक कर रही है। और जनता ने सजा भी इनको दे दी चुनाव हरा कर पर एक ही बात पर मीडिया आज तक लाखो बार मुर्दे मुद्दे पर एक हीआदमी को बार बार फंसी दे रही है।
  • तीसरा सरकार एन डी एया की जब तक रही तब तक हर रोज संघ, विहिप और बजरंग दल की रोज नई कहानी सिल सिलेवार दिखाई गई।
  • चोथा रोजाना सरकार की बखिया उधेडी जाती थी कभी अडवाणी और अटल जी के बीच जंग और कभी ममता समता और जया के बीच। और कुछ नहीं मिला तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू को पैसे लेते टीवी पर दिखाया गया. और कुछ नहीं तो जूदावे जी का स्टिंग ओपरेशन दिखाया। मतलब एन डी अ की सरकार के छह सालो मैं स्टिंग ओप्रशनो की बाड़ आगई थी. मीडिया ने स्टिंग ओप्रशनो के जरिया हर रोज सरकार की बखिया उधेडी रोज झूटे आरोप लगे.
    और हम इस को माफ़ करते रहे की चलो विपक्ष की भूमिका मैं इस बार मीडिया है. विपक्ष कमजोर हैं इसलिय जनता के हित मैं मीडिया यह काम कर रही है.परन्तु मैं गलत था.मीडिया सरकार की बुराई नहीं कर रही थी मीडिया तो सोनिया, कोमुनिसटों और विदेशी ताकतों के एजेंट का काम कर रही थी. क्यांकि सरकार जाने के बाद भी सिर्फ और सिर्फ हिन्दू संघटन और बीजेपी ही नज़र आई
अब मीडिया का रोल यु पि एया के शासन मैं देखो।
  • राहुल गाँधी ने अमठी मैं कांड किया जिसका की अभिषक मनुसिंघवी ने अमरीका मैं ऍफ़ आई आर दर्ज करा रखी है. परन्तु मजाल है अंतरअष्ट्रीया मीडिया के लाख लिखने पर भी पुरे हिंदुस्तान की मीडिया ने एक लाइन भी लिखी हो. बुरे मैं तो छोडो अच्छे मैं भी जीकर नहीं किया. और वरुण गाँधी के बारे मैं रोज २४ मैं से २३ घंटे एक मात्र वरुण गाँधी को लानत भेजना है. क्योंकि विपक्ष मैं हैं, हिन्दू है।
  • एक स्टिंग ओपरेशन पिछले पञ्च साल मैं नहीं हुआ। पता नहीं तहलका के जाबांज पत्रकार कहां मर्दानगी दिखा रहे है या बीजेपी की सरकार निश्चित मान कर स्टिंग ओपरेशन की तयारी कर रहे है. तरुण तेज पाल का तेज और तरुनाई अब दोनों ही गायब है. उस समय तो ब्लड प्रेशर भी बढ़ रहा था और जौर्नालिसम की नातिकता पर भी बहुत प्रवचन कर रहा था परन्तु अब इसी नातिकता याद नहीं। इस कांग्रेस शासन मैं कांग्रेस ने मीडिया की भी राजनितिक मुद्दों का तो जिक्र ही नहीं करने दिया। लगता है की इन लोगो के मुह भर दिया गए थे जबी तो इतने बड़े बड़े कांड होते हुए भी कोई लडाई की मीडिया मैं खबर नहीं दी परन्तु बीजेपी के शासन मैं अटल अडवाणी जी की हर रोज नई स्टोरी दिखाई गई चाहे झूठीही क्यो न हो इस मीडिया ने.
  • उस बीजेपी की शासन मैं झूटे घोटाले कफ़न घोटाला,
  • तहलका कांड रचा गया
  • परन्तु इस कांग्रेस सोनिया राज मैं सच्चा वोट नोट कांड हुआ इस्रेअल हतियार घोटाला,
  • गेहूं घोटाला,
  • रेल घोटाला,
  • लालू जमीन घोटाला,
  • क्वात्रोची भगाओ कांड,
  • सुखराम कांड,
  • बी आर टी घोटाला,
  • सब्सिडी घोटाला परन्तु मीडिया ने इनकी जानकारी नहीं जनता को दी बस दिखाया तो साँप नागन, भूत प्रेत, ई पि एल का शो
  • और फ़िल्मी कलिया ही खिलाती रही।
  • सोनिया मनमोहन कृष्ण सुदामा लगते रहे
  • राहुल प्रियंका आँखों के दो नूर लगते।
  • यु पी एया का झगडा प्यार भरी मनुहार लगती रही।
  • कोम्निस्टओ का सरकारछोड़ना प्रियतमा का रूटना लगता रहा।
  • लालू की बेटी के साथ पढने वाला अभिषेक (हत्या का संदेह) एक हादसा ही लगा रहा।
  • सोनिया त्याग की देवी और अडवाणी इनको फूटी आंख नहीं भाया।
  • सरकार कांग्रेस और घटकों की परन्तु स्टिंग ओपरेशन बचारे संजय जोशी का. जो की जनता के लिया बिलकुल अनजान चेहरा (परन्तु मीडिया का तो भाड़े पर काम था )

यह तो बहुत लम्बी फहरिस्त होजयगी।

सवाल यह है की मीडिया कांग्रेस के शासन मैं उठा क्या रही थी -

  • अडवाणी का पाकिस्तान मैं जिन्ना पर बयान।
  • राजनाथ और अडवाणी का (झूठा ही सही)
  • मोदी का जलता गुजरात।
  • हिन्दुओ का कंधमाल मैं पर्दर्शन दिखाया परन्तु स्वामी जी की हत्या और इसईओ का हिंसा का तांडव नहीं दिखा
    राम सेतु है ही नहीं, अमरनाथ है ही नहीं
  • बाबु बजरंगी ही देश का कोई बहुत बड़ा नेता है जो उसी के बयान दिखा ते रहे।
  • जम्मू पर हिन्दुओ का जलूस अत्याचार बताया गया और श्रीनगर मैं हिंसा का नंगा नाच नहीं दिखा.
  • उमा का अडवाणीजी को मीडिया के सामने आरोपित।

ऐसी ही लाखो घटनाओ का जिक्र नहीं था, सरकार ने पांच साल शासन किया है परन्तु सरकार के विरुद्ध एक भी टिप्पणी नहीं किसी भी समाचार पत्र या चैनल मैं. न कोई आन्दोलन। न कोई अभियान। है तो बस कांग्रेस सरकार की चटोकारिता और त्याग की देवी का महिमा मंडन.
हाँ अभी स्टोरी ख़तम नहीं याद रखो यदि बीजेपी की सरकार आगई तो अब आप फिर से नाग नगन और भूत प्रेत और हीरो हेरोइन नहीं देख पायंगे सारी की सारी मीडिया तुंरत राजनीती के केंद्र मैं आकर फिर से आम आदमी के मुद्दे यानि की बीजेपी हिन्दू विरोध उठआयगी जैसे -

  • नीतिश और अडवाणी का टकराओ।शरद यादव का अडवाणी से झगडानए संघचालक भगवत जी और सरकार से टकराओ।हिन्दू संघटनओ का मुस्लिमो पर अत्याचार।,बीजेपी का हिन्दू हितों पर जेडीयू से टकराओ।,राजनाथ मोदी और जेटली मैं कल्हे, अडवाणी जी संघ के विरोध मैं बोले।वरुण बीजेपी के लिय भस्मासुर, मोदी की अडवाणी जी से नाराजगी, संघ भारत को कैसे हिन्दू राष्ट्र बना रहा है।,जोशी जी संघ के साथ पर अडवाणी जी से मतभेद)
  • तो कुछ कुछ इस प्रकार की ही रिपोर्टिंग माने आप की होगी ही। सोनिया राज मैं पांच साल आपने न्यूज़ चैनल मनोरंजन चैनल बने रहे और अब फिर दोबारा से बीजेपी के सरकार बना लेने से दोबारा राजनेतिक न्यूज़ ही देंगा अच्छा अब फिर आप इनसे कहोगे की इस प्रकार की एक तरफा न्यूज़ ही क्यों दिखा रहे हो तो जवाब देंगे की पहेले आप लोगो की आलोचना करने पर ही तो हम राजनेतिक न्यूज़ दिखा रहे हैं और आप फिर से हम न्यूज़ चनलो की आलोचना कर रहे हो.

तो दोस्तों इस साजिश को समझे और भारत की इस बिकाऊ नाटक अपने पटाक्षेप करे नहीं तो दलाल संस्कृति न केवाल राष्ट्र को बल्कि आपके घर को भी निगल जायगी. बीजेपी की सरकार बन ने पर आप पूरी तरेह से इस नंगे परन्तु सचे नाच को देख सकते है।

परन्तु दुःख के साथ कहना पड़ता है की तबआप नाग नागन और भूत प्रेत की कहानी नहीं देख पाएंगे देखेंगे तो बस हिन्दू परिवार(संघ परिवार) की हर व्यक्तिगत बात अपने ही (सेल्फ मेड) स्टिंग ओपरेशन. तो तैयार रहे स्टिंग ओपरेशन देखने को और मीडिया के वीर फौजियो vir faujio की ललकार को suneneसुनने को जो पिछले पांच सालो अपने नही सुनी थी क्योंकि पुराने पैसे पर पलकर आराम कर रहे थे जो अब तैयार है. यह देशद्रोह नहीं तो क्या है???????????????