Saturday, May 30, 2009

मुसलमानों को कांग्रेस का इनाम क्या होगा??????

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अब कांग्रेस का जो सबसे बड़ा अजेंडा है वो इस पर गंभीर रूप से विचार करना है की अमेरिका के डर से दाडी वाले मुसलमानों को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व तो दिया नहीं। क्लीन शेव अब्दुल्ला ही सही। और अलाप्संख्यक मामलो का मंत्री भी उसे बना दिया जिसको मुसलमान, मुस्लमान ही नहीं मानते। तो ठाना यह गया है की हिन्दुओ को उनकी औकात तो बतानी ही पड़ेगी भाई छोटी मोटी चीजे तो कांग्रेस ने पहेले ही करली थी जैसे की २ और ५ के सिक्को पर चर्च के क्रॉस का निशान। आंध्र में इसाइओ को हज की ही तर्ज पर अनुदान, मुसलमानों को आरक्षण भले ही फिर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया हो। तो अब क्या दिया जाये क्योंकि मुस्लमान भाई सच्चर पच्चर की रिपोर्ट में तो ज्यादा इंट्रेस्टेड है नहीं क्योंकि इतना ही होता तो परिवार नियोजन और शिक्षा पर खुद ही ध्यान देते सो यह तो भूल ही जाओ की देश के २५ करोड़ मुस्लमान लोग कोई सच्चर या खच्चर की रिपोर्ट में रूचि रखेंगे। यहाँ कांग्रेस तो पुरी रूचि ले रही है और पुरे जोर से देने पर तुली भी है। यहक्लिक करे
हाँ यदि कांग्रेस बाबरी ढांचे के जगह मस्जिद बनवा दे तो फिर तो कहेने ही क्या। परन्तु कांग्रेस के बाप की भी इतने औकात नहीं। सो इसको भी भूल जाओ।
तो कांग्रेस ने विचार किया है क्यों न टेनिस की भाषा में डयूस किया जाये अर्थात जो दर्द मुसलमान (कतिथ तौरपर) लिए घूमते है भले ही ४०० साल से हिन्दू कुछ भी करता रहे, वो क्यों न हिन्दुओ को देदिया जाये। इस बात की प्रतिबधता जानने के लिया यंहा क्लिक करे
हाँ मुद्दे की बात यह है की इस बार वो राम सेतु तोड़ ही दिया जाये। क्योंकि कांग्रेस को बहुमत इसीलिए तो जनता ने दिया है। तो जनाब हम कांग्रेस्सियो ने इसिलिया उस अम्बिका सोनी को जिसको जनता को बेवकूफ बनाने को हटा दिया था अबकी बार जनता की ही आँखों में धूल झोंकते हुए और भी ज्यादा वजनी कैबिनेट मंत्री बना दिया। और मंत्रालय भी देदिया वो भी इन्फोर्मेशन एंड ब्रोडकास्टिंग याद दिला दू यह वो ही है जो अपनी सुषमा जी और अडवाणी जी और प्रमोद महाजन पर भी किसी समय था इन नामो का जिक्र इसलिय किया है ताकि आपको सनद रहे की कितना महत्व का स्थान है यह। तो यह एक पुरस्कार है अम्बिका जी को हिन्दुओ की औकात बता ने के लिए की तुम्हारे राम सेतु को मैं ही तोडूंगी कुछ बिगड़ सको तो बिगड़ लो। यह अम्बिका जी हैं भी क्रिस्चन और हा भारतीय विदेश सेवा में रह चुकी है और राजीव जी और सोनिया जी के परिणय सूत्र में बंधवाने में अति अति महत्वपूर्ण योगदान था।
दूसरा इनाम मराठा छत्रप विलासराव देशमुख को मिला है। इनको आपको चिडाने के लिए ही है की इस्लामिक आतंकवाद ने तुम्हारी मुंबई (जिस पर मराठो को बड़ा गर्व है) की विनाशलीला की कहानी लिखने वाले इस्लामिक आतंकवादियो से रक्षा नहीं कर पाने में असमर्थता के लिए जनता की आँखों में धूल झोकने के लिए मुख्यमंत्री के पद से हटालिया अब फिर से केंद्र में हिंदुस्तान की छाती पर कैबिनेट मंत्री बना कर बैठा दिया।
लो हिन्दुओ ने और भारत की जनता ने इन दोनों का क्या उखाड़ लिया। मीडिया भी बेचारी विशेष रूप से नोऊ टीवी के अर्नभ गोस्वामी भी इस बात पर बगले सी झाँक रहे है।
हाँ बात कर रहे थे राम सेतु की तो कांग्रेस का इसको तोड़ना बड़ा ही आवश्यक है कारण कसब को फांसी, अफजल को फांसी, मुस्लमान को आरक्षण, श्री कृष्ण रिपोर्ट पर कार्यवाई, नानावटी रिपोर्ट पर कार्यवाई, आंध्र में मुसलमानों कर आरक्षण का लटका मामला, बाटला काण्ड पर कार्यवाई, सच्चर रिपोर्ट को लागु करना, सेना में मुसलमानों की भर्ती, कश्मीर में स्वायता का मामला, गुजरात के दंगा पीडितो को अशरफिया (५९ हिन्दू कारसेवको के मृत परिवार वालो का पता नहीं को ठेंगा), असाम में बसे और बाकि देश में ५ करोड़ बांग्लादेश मुस्लमान को भेजना,
और भी अनगिनत यह सब काम तो कांग्रेस को करने ही है, नहीं तो राम सेतु तोड़ो बराबर करो। सौ सुनार की और एक लुहार की। बस कांग्रेस को येही करना है, विकास पिकास करना होता तो पिछले साठ साल में न होजाता। वो तो करना है ही नहीं। लो भाई हमारी कांग्रेस ने तुम्हारी मस्जिद तुड़वाई थी हम इनका राम सेतु तुड़वा दे। होगया मामला बराबर, होगई धरमनिर्पेक्षता की रक्षा। बनगया भारत एक।
अरे भैया कांग्रेस को तो पता ही नहीं था की हिंदुस्तान की बावली जनता दुबारा भी कांग्रेस की सरकार बना देगी नहीं तो किसी पागल कुत्ते ने काटा था जो मनमोहन जी को दोबारा कांग्रेस प्रधानमंत्री का उमीदवर बनाती, भाई जरा याद करो यही सोनिया माइनो जी तत्कालीन राष्ट्रपति कलाम जी के पास प्रधानमंत्री बनने न जाती। मजबूरी में सरदार मनमोहन सिंह को आगे किया था और तथाकथित त्याग की देवी कहलाई। तो अब पता होता की हिंदुस्तान की बोराई जनता दोबारा कांग्रेस को चुनेगी तो राहुल बाबा को प्रधान मंत्री न बनाती उस बचारे को मंत्रिमंडल शपथ में दाडी तो बढानी न पड़ती। पर होनी को कौन टाल सकता है। सोनिया गाँधी ने अपने पिछले शासन में मुद्दे ही बीजेपी के लिया छोडे थे वो ही फैसला करे कसाब का और अफजल का। परन्तु क्या पता था की जिनके लिए खाई खोदी थी एक दिन उसी में गिरना पड़ेगा और चौबे जी छब्बे बनने गए थे और दुबे बनकर अगये।
क्योंकि कांग्रेस को अब रही सही राज्य सरकारे भी खोनी पड़ेगी। जहाँ से राज्यसभा की सीट आती है वहा पर तो कांग्रेस अल्पमत में ही है। सोनिया माइनो का तो सारा प्लान ही इस बावली जनता ने चोपट कर दिया। पांच साल में चुप चाप राहुल बाबा की उस क्रिस्चन लड़की से शादी करनी थी इतने में लोकसभा के चुनाव आते राहुल बाबा धमक से प्रधान मंत्री बनते अब क्या होगा। थूक कर चाटना होगा यदि मनमोहन को हटाया। अब तो राम ही कुछ करेगा धरती पर नहीं तो ऊपर से ही।
एक बेचारा बिहार से किशनगंज जैसी मुस्लिम बाहुल्य सिट से मुस्लमान कांग्रेसी जीत कर आया था सोचा था बीजेपी के टाइम में यही से जितने पर शहनवाज हुसैन को बीजेपी ने हवाई जहाज मंत्री बना दिया तो मुझे शायद रोकिट मंत्री बना दे पर कम्बखत पता नहीं कांग्रेस का की कुछ देना ही नहीं भैया सिर्फ ठेंगा मिलेगा। लेने वाले तो ससुर दामाद लेगाए। चरण भाट लेगाए देखा नहीं कर्नाटकी, तमिलनाडु, केरला से लेगाए। भैया अमरीका के आगे घिघयाने वाले को आनंद शर्मा को भी बड़ा मंत्रालय वाणिज्य देदिया। अब तुमेह क्या दे तुमेह तो हिन्दुओ का दर्द दिया जायेगा जिस से की तुम खुश हो जाओ की कांग्रेस कितनी धर्मनिरपेक्ष हे ढांचे के बदले सेतु तोड़ तो रही है।
भाई वहा एसा न्याय तो विक्रमादितिया भी देखे तो उफ़ कर दें।
ये कांग्रेसी न्याय है जो इटली से आया है। उसके बाद तैयार होजाओ यह पांच साल कांग्रेस के सफल होगये इन्शाल्ल्हा फिर इस को सीधा वेटिकेन सिटी के अर्न्तगत ही लेलेनेगे कौन बार बार चुनाव करवाए। जनता बावली है इस बार तयारी ठीक थी चुनाव आयोग अपना, राष्ट्रपति अपनी, प्रधानमंत्री अपना, सारे मंत्री चरणों में साष्टांग, और हाँ हा हा हा अब तो जनता भी अपनी हुई हिन्दू मुस्लमान सब एक हुए। एक स्वर से जौर से बोलो जय हो। फिर क्यों न तोडे राम सेतु और क्यों न चले वैटिकन। आंध्र वाले तो १००% मान गए इसाई राज, केरला वाले पहेले ही माने हुए थे, अजित छातीइस्गड़ गये थे पता नहीं क्या हुआ जनता मानी नहीं वैसे कांग्रेस की बात कम ही लोग ठुकराते हैं। पता नहीं बीजेपी को क्यों वापस चुन लिया छातीगद में।
चलो भाई बस बहुत हुआ बीस हजार हिन्दू तमिल ही तो श्रीलंका में मरे है। पर करे तो करे क्या जब हिन्दू ही हमें जिताते है तो हम क्यों न करे। अब आस्ट्रलिया में मर रहे है तो क्या करे कौनसा मेरी सरकार गिर जायेगी। डंके की चोट पर हिंदुस्तान की छाती पर राज करेंगे बेटे को युवराज और खुद को राजमाता केहेलायंगे। अब तो सुष्माजी को भी कोई आपति नहीं। फिर एक बार जय हो।

Friday, May 29, 2009

क्या प्रधानमंत्री आज रात सोयेंगे ??????????


मुझे लगता है भारत का प्रधानमंत्री या तो दुसरे ग्रह से आए है या हिन्दुओ का बजा बजाने का ठेका लिया हुए है.
प्रधानमंत्री के रूप में इस महान शख्शियत को एक मुस्लमान के आस्ट्रलिया में पकडे जाने पर रात भर नींद नही आई थी. रात भर जागता रहा। नींद ही नहीं आई की हिंदुस्तान के एक मुस्लमान को आस्ट्रलिया ने आतंकवाद की घटनाओ में संदेहास्पद जान कर पकड़ कैसे लिया । अरे यहाँ हिंदुस्तान में तो घटना करने के बाद भी घर जमाई मानते है और आपने उनको जेल के संखिचो के पीछे धकेल दिया। जब तक वो वापस हिंदुस्तान नही आगया यहाँ उसे सेलिब्रटी जैसा स्वागत नही मिला तब तक तो माननीय प्रधानमंत्री ने भोजन नही किया.
और जब आज दिन रात हिंदुस्तान के हर एक चैनल और अख़बार बता रहे है की हिंदुस्तान के नौजवान बच्चे आस्ट्रलिया की सडको पर दरिंदो द्वारा लहू ल्हुअन हो हस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़राहे है तब हिंदुस्तान का यह अजीम शख्श अपने शेयर मार्केट और नए मंत्रियो के रंगीन ख्वाबो में खो रहा है. एक बयान अभी तक नहीं आया की वहा पर हिन्दुस्तानी नौजवानों का होगा क्या? क्या आस्ट्रेलियन दरिंदो के सामने वो लोग इसी तेरेह से घुटने के बल बैठे पिटते रहेंगे. अरे आप की चीन मैं राजदूत निरुपमा जी को चीन सरकार रात के दो बजे उठा कर तिबत के प्रदर्शनकारियो पर नोटिस देदिया था और आप मुह ताकते रहे थे.
वहा वियना में एक संत को मार दिया और आप यहाँ पर उस घटना के विरोध में हुए प्रधार्शंकरियो पर तलवारे भांज रहे हो. अरे हिमत है तो आस्ट्रिया सरकार से जवाब तलब करो और शीघ्र अति शीघ्र उन दुर्दांत आतंकवादियो को पकडवा कर घुटनों के बल हिंदुस्तान की धरती पर इन प्रदर्शनकारियो के सामने घिघवा क्यों नहीं देते. कब यह शशि थरूर काम आयेगा अभी भी इनका लाभ नही लिया तो फिर क्या। एअसे ही तो कांग्रेस के टिकेट पर १० -१० साल से जीते हुए सांसदों को मंत्री नही बनाया। इन सहाभ को तो पहेले ही बार में। कुछ तो लाभ लो इनकी संयुक्त परिषद् की कुर्सी का। या खाली मोदी जी को ही हूल देने का बीडा उठाया है. एक और नई जाँच बिठा कर दी, तीन तीन चुनाव हरने के बाद भी आप नही छोडेंगे।
आपको रात भर नींद नहीं आई थी एक मुस्लमान के आस्ट्रलिया में पकडे जाने पर. आपने भारत के सभी संसाधनों पर भी इन्ही का अधिकार पहेले बताया था. तो क्या बिना एकभी हिन्दू के वोट के सिंह इस किंग बनगय दूसरी बार भी। अरे शर्म करो श्री प्रधानमंत्री जी उन बच्चो को हलहाल होते और उनके रिश्तेदारों को हलकान होते बचा तो लो। अरे न अपनी नींद ख़राब करो दिन की इक मिनट ही उनपर बर्बाद करदो एक बयान ही देदो। और नहीं तो कम से कम हाई कमीसन जो दिल्ली में बैठा हुआ है उसे ही जवाब तलब करलो.
हिन्दुओ का खून इतना भी पानी नहीं हुआ परधानमंत्री जी की आप उनका इसप्रकार तृसकर ही करदो.
आप चाहे कैसे भी बने प्रधानमंत्री पर हो तो २५ करोड़ हिन्दुस्तानियो के और जो मर रहे है वो हिन्दुस्तानी ही है क्या हुआ जो मुस्लमान नहीं. उनको बचाना तो आपको ही पड़ेगा. बड़े आदर से एक बात कहूँगा प्रधानमंत्री जी आप कमजोर नही है यह तो मानगाये अब सहाभ सिद्ध भी तो करदो। क्योंकि निर्णायक और मजबूत लोग अभी घाव ही धो रहे है। आप वहा मरहम नही लगा सकते यहाँ आस्ट्रलिया में पिटे, लुटे, घायल भारतीयों पर तो लगा दो.
सोचो इसी आस्ट्रलिया ने नुक्लिएअर टेस्ट करने, उसके पादरी ग्राहम के उडीसा में मरने, या कंधमाल की घटनाओ ने हम हिन्दुस्तानियो से नाक रगड़वा दी थी। और हम है की अभी अपने मंत्री मंडल के बाप बेटे, सासुर और दामाद की कुर्सी बिछाने में ही लगे है। अब तो सरकार को रंगीन खुमरियो से बहार आजाना चाहिय.
हम आपकी कार्यवाही का इन्तजार करे या सभी बाकि बचे हिन्दुओ के हिंदुस्तान में मुस्लमान बनाने का?

Wednesday, May 27, 2009

कसाब क्यों हँस रहा है??????????????

बड़ी ही विचित्र और हास्यप्रद स्थिति है की एक आतंकवादी जो की अदालत में खडा है बार बार मुस्करा क्यों रहा हैं? और मीडिया में यह खबर तस्वीर के साथ लीक क्यों की जा रही हैं. क्या हमारी नपुंसकता का सड़क पर प्रदर्शन नहीं है. प्रशन दो उठते हैं एक तो कसाब मुस्करा क्यों रहा है दूसरा मीडिया में इस खबर को लीक क्यों किया जा रहा है.
पहेले प्रश्न कसाब के मुस्कराने का है. ये दुर्दांत आतंकवादी हँसे तो हँसे क्यों नहीं.
  • जिस देश के लोग मुंबई बम धमाको के बाद भी न केवल सरकार को माफ़ करदे बल्कि उसे भारी बहुमत से जीता दे तो वहां पर कसाब हँसे न तो क्या करे. ये मोमबत्ती की पैदाइश जब निकली थी तो आतंकवादियो की ही मुस्कराहट को ही रोशन कर गई.
  • जिस देश में अफजल गुरु जैसा खूंखार आतंकवादी अभी सरकारी मेजबानी में वर्जिश कर कर अपने सहेत बना रहा है. जहाँ पर दरिन्दे आतंकवादियो को देश का विदेश मंत्री बाइजत छोड़ कर आता हो.
  • जिस देश में आतंकवादी को सजा तो दूर उसपर कानून बनाने को ही झगडा होता हो.
  • जिस देश के अन्नदाता अर्थात किसान रोज आत्महत्या करते हो और चुनाव में वो मुद्दा ही न हो और वो ही खुनी सरकार को फिर से सरकार बनाने देदिया जाये।
  • जिस देश में मोमबती वाले लोग सेम्लेंगिक विवाह कानून बनाने के लिया प्रदर्शन करते हो,
  • दुर्दांत आतंकवादियो का कट्टर समर्थक विनायक सेन जैसे की रिहाई की मांग करते हुए भोंडा प्रदर्शन करते हो. और रिहाई होने पर अपने ही देश को दुसरे देशो की नजरो में खलनायक साबित करते हो.
  • जिस देश में मीडिया शिखंडी का रूप धरती हो , ३०० निर्दोष नागरिको की रिहाई की पेरवी करती हो और बातमानने पर उसी देश के ग्रहमंत्री को और सरकार को अरोप्ती करती हो.
  • वोट बैंक के संतुलन में विश्व्यापी इस्लामिक आतंकवाद के सामने छदम हिन्दू आतंकवाद खडा करना। और उन शांतिप्रिय हिन्दुओ पर आरोप लगाना जिनोहोने नपुंसकता की हद तक जाते हुए अहिंसा का समर्थन किया और तिबत और नेपाल जैसे देश भी गवा दिए। यह उन हिन्दुओ पर आरोप है जो अपने ही देश में कश्मीर से बिलबिलाते भागे हुए और दिल्ली के शिवरों में अपनी हसरतो को दम तोड़ते हुए देख रहे कश्मीरी पंडित की न रक्षा करने वाले। जिनकी माताओ और बहेनो की नंगी जन्घाहो पर पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लिखे गए थे।
  • जो हिन्दू अपने ही राम की रक्षा नहीं कर पाते वो बेचारे उनकी रक्षा का वादा करने वाले नायक वरुण को खलनायक बनाने पर तुले हुए है.
  • उस मीडिया पर विश्वाश करते हो जो हर समय यही याद दिलाती हो की सोनिया परिवार की चरण भाटगिरी करने में ही सुख है.
  • वो देश जो चाटुकारों की सिरमौर पार्टी, के सरताज हो जहा कभी लोकतान्त्रिक पद्दति से पार्टी में आन्तरिक चुनाव न हुए हो जहाँ पर सिर्फ और सिर्फ हाईकमान से चाटोकारो का मनोयान ही होता हो और जिस देश के नागरिको ने देश की कोने कोने में जाकर, लोकतंत्र के लिए जेल की तपती भट्टी में तपे हुए को लात मारकर। इक वंशवादी, भडवो और दोरंगे लोगो को देश की सत्ता सौप दी है.
  • जहाँ पर २० करोड़ लोग रात को भूखे सोते हो, दुनिया के सबसे हिंसात्मक देश इराक के बाद सबसे ज्यादा देश के नागरिक रोज कुत्ते बिल्ली की तेरहे मरते हो। जहा देश के लोग बम धमाको में मरे और अपहिज परिवार वालो को ढोते फिरते हो और फिर भी देश के सबसे बड़े अलोकतांत्रिक प्रधानमंत्री को दुबारा सत्ता सौपते हो.
  • जिस देश के घोषित रूप से पूर्व सैनिक सरकार के घोर रूप से अपने को नजरंदाज करने पर उसके मुह पर अपने जीते मैडल मारते हो।
  • जिस देश के लोग एक निर्लज, भ्रष्टचारी, परित्याग्य और घोर रूप से जलील करके क्रिकेट टीम से लात मारकरनिकाले जाने पर, अनजान प्रदेश के न मालूम स्थान से मुस्लिम गुंडई वोट बैंक की वजह से विजय हो जाये। और उसपर उसे माननीय सांसद कहकर और उसकी बीवी को बिठा कर आगे देश के भविष्य की बात करे.
  • जिस देश की सबसे बड़ी पार्टी के घोषित स्वम्बू सर्वशक्तिमान नेता गरीब होने (चुनाव आयोग को दिया ब्यौरे के अनुसार) और गरीब लोगो के (आम आदमी) के हितचिन्तक होने का स्वांग भरते और उसी पार्टी के १५० से ऊपर करोड़पति उमीदवार लोकतंत्र के मंदिर संसद में देश की छाती पर पिशाची अट्टहास लगाये.
  • जिस देश का दुनिया भर में लोकतंत्र का खुटा गाड़ने का अभिमान हो उसी देश का चुनाव परक्रिया का सबसे बड़े अहोदे का संवेधानिक व्यक्ति सरकार में चाटुकारी और चिरोरी करते मंत्री पद पर सुशोभित हो. इसे लोकतंत्र का ढोंग नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगेकल यदि नवीन चावला रिटायर होकर कांग्रेस का राष्टरपति का दावेदार हो तो आश्चर्य मत कीजिय गा .
  • जिस सप्रंग सरकार ने वाम दलों को समर्थन देने की एवज में बंगाल सरकार का 2004 में अभयदान देदिया हो. उसे लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी जाना बताना हिटलर और मुस्लोलिनी का भी अपमान है.
  • जिस नेता को दाऊद के संपर्को और अभी गेहूं की दलाली में संदेहस्पद देखा गया, जिसने १०० करोड़ हिन्दुओ की माँ को हिन्दू आतंकवादी पैदा करने का आरोप लगाया । उसी नेता को कृषि मंत्री बना कर देश को खोखला करने का परमिट दिया जा रहा है.
  • जिस देश में हिन्दुओ को घुट घुट मर जाने के लिया कहा जाता हो, दो देश इस्लामिक आतंकवादियो को 1947 में देदिए हो उसके बाद उनको बचे खुचे देश में आरक्षण देने का वादा हो.
  • मुस्लिम लीग का नेता देश का मंत्री हो और विदेशो में भारत का प्रतिनिधित्व करता हो उसी देश में हिन्दू महासभा , संघ और हिन्दू संगठनो को बधिया करने की कसमे खाने वालो को इनाम दिया जाये।
  • जिस देश का मानव संसाधन मंत्री अपने नाम पर मुस्लिम यूनिवर्सटी में सड़क का नाम रखवाने में इस्लामिक आतंकवादियो की न केवल पेरवी करता हो बल्कि उनको हिन्दू कर्दाताओ का पैसा भी देता हो। जिसका बुढापा इन्ही हिन्दुओ के श्राप की वजह से दरिद्रता से बीतेगा बल्कि अपहिज और धरती के रेंगते परजीवी से भी बत्तर बितताता प्रतीत होता है .
  • जिस देश में वरुण जैसे नायक जो अपने समाज को मुस्लिम गुंडों से बचाने का वादा करता हो उसी को जेल में दाल कर एक राजवंशी युवती अपने भोलेपन को हतियार बनाकर अठखेलिया का अभिनय करे और अट्हास करते हुए उसे गीता पड़ने के सलहा दे।
  • जिस देश में अपने तपे तपाये धरती से जुड़े नेताओ को जमिनोदोज करकर उसपर मिटटी डालने में तत्परता उनपर राज कर रहा है वो खुद क्यों चुनाव क्यों नहीं लड़ता , उसकी नेता पर घोषित रूप से एक दलाल को देश से बहार भगाने की आरोपी है। देश का पैसा बहार भेजने की भी आरोपी है परन्तु जिस देश का चोथा स्तम्भ कहे जाने वाला मीडिया और उस देश के नागरिक इस बात की जानकारी न लेना चाहे और न देना । जिनकी रुचि अभी भी हारी , धकियाई , आज मरंसन्न , और हौसला पस्त पार्टी के एक एक संसाद में ही रुचि लेती हो और बताने और जानने को उत्सुक लोग के नेता विपक्ष कौन होगा। बिना इस बात की चिंता करे की क्यों सारी जिंदगी विश्व बैंक की सेवा करने वाला बिना चुने देश का प्रधानमंत्री बनगया , क्यों सयुक्त परिषद् में सारी जिंदगी नौकरी करने वाला चुनाव से महज एक महीने पहेले केरला से कांग्रेस के टिकेट पर जीतकर पहेली ही बार मंत्री भी बनगया हो। जिस देश का मीडिया इस बात में रूचिलेता हो जो साक्षात् षड्यंत्र की और संकेत कर रहे है. वो देश के नागरिक अभी भी गोबर में विटामिन ढूंड रहे है। और उस विटामिन का स्वाद लेले कर अपनी तृष्णा मिटा रहे है.
  • हो जो देश यह भी न जाने की जो जिस देश में आतंकवादी अफजल और कसाब जैसे को सेलिब्रिटी का दर्जा दिया जाये. जिसको की पता हैं अभी कुछ समय बाद येही लोग बाइजत देश से बहार घर छोड़ने जायेंगे
  • जहा पर तेहेल्का और उनके जैसे निष्पक्ष (स्वघोषित) पत्रकारों की नौकरी ही बीजेपी के शासन में झूटे स्टिंगओपरस्शन बनने से होजो दलाली को भी पत्रकारिता कहेते होउनको गेहूं में, टेलकॉम में हतियारो में, कौत्रोची में, ने अमेठी बलात्कार कांड में, सी बी में, उसके दुरूपयोग में, रेल में, कोयले में, चुनावआयोग में, उसके मंत्री पड़ स्वीकारने में, उप्र के राजभवन में, तीस्ता सीतलवाद के ग़लत हलफनामे में, बंगाल के मर्क्स्वदिओ में, ने प्रियंका के सव्सुर के मरने में, अमर सिंह की सी डी में, हुड्डा की हरियाणा की जमीन में, अजित जोगी के क्रिस्टन मिसनारियो के संबंधो में, सुब्बा राव की विदेशी नागरिकता में, असम की गोगिया सरकार की बंगाल्देशियो को बंसाने में, दिल्ली की बिजली, सी एन जी और बी टी आर घोटाले में, देश भर में सड़क बनने के कारण में, वरुण के एक बहुत अन्तर से जितने में, जोशी जी जैसे एक बड़े गुंडे को हरा पाने की कहानी में, हिंदुस्तान में मरते किसानो में, दम तोड़ते कश्मीरी पंडितो में, दिल्ली में १०००० गुमहुए बच्चो में
  • रूचि है तो राहुल भइया की जे जे कार में और हिन्दुओ की बची खुच असीमित से खेलने में.
अब वंहा पर कसाब हँसे न तो क्या करे. वो तो तुम्हरी नपुंसकता पर मुस्कराकर तुम्हारी नसल को बधिया होते देख रहा है.

Saturday, May 23, 2009

सोनिया गाँधी का छोटा और घटता कद !

जी हाँ ये राजनीती की एक हकीकत यह भी है. आज भ्रम रह जाये पर सचाई यह है की सोनिया और राहुल गाँधी का कद बहुत ही छोटा होगया है. सत्ता के सिरमौर आज शीर्षासन कर रहे है. आज जो लोग सोनिया और राहुल की जय कर रहे है हकीकत उनको भी पता है की झूटी जय जयकार है यह. इसमें बहुत सारे पेंचहै. देखिया एक बात तो बहुत ही स्पष्ट है की बहुमत किसी भी प्रकार से सोनिया या राहुल को तो बिलकुल ही नहींमिला है. बहुमत मिला हैं सरदार मनमोहन सिंह को. इस बात की पुष्टि बहुत सारे तथ्यों से होती है जैसे -
  • सोनिया गाँधी कभी भी चुनाव के अंतिम चरण में कोउत्रोची को बरी करने की हड़बड़ी नहीं दिखाती. अब बहुमत के बाद शांति से उस केस को निपटती. परन्तु सपने में भी नहीं सोचा था की भारत की जनताकांग्रेस को बहुमत देगी.
  • दूसरा कांग्रेस के लिया २००४ में मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाना मज़बूरी था तो अब कांग्रेस सत्ता मेंपहेले से अधिक सक्षम बनके आई है तो अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह क्योँ? यदि पहेले मालूम होता तोराहुल के नेतृत्व में कांग्रेस लड़ती. इस बात का कांग्रेस को बहुत ही अफ़सोस हैं. और अपने ही बनायेजाल में खुद फंस गई. मेरी इस बात की पुष्ठी इस बात से भी होती हैं की आज कैबिनट में मंत्रियो का चुनावप्रधानमंत्री के पास है सोनिया तो बस दिखा रही हैं की उसीका निर्णय हैं. कांग्रेस आज अपने को बहुत हीमजबूत परन्तु गाँधी परिवार अपने को बहुत ही हीन और कमजोर महेसुस कर रहा है. जो खेल कल तक सोनिया और गाँधी परिवार मनमोहन सिंह के साथ खेलता था आज होनी देखिया वोही सोनिया के साथ होगया. इसिलिया कहेते है की ऊपर वाले की लाठी बेअवाज होती हैं.
  • सोनिया तो मनमोहन को हरा हुआ उमीदवार मानकर चुनाव लड़रही थी. अब रपट गए तो हर हर गंगे. इसकी पुष्टि सोनिया की भावः भंगिमाये और चेहरे की उदासी साफ़ बयां कर रही है.क्या चेहरे पर वो २००४ वाली चमक है। नही कतई भी नही।
सरदार मनमोहन सिंह पुरे अधिकार से सरकार चलाने को उतावले है. और येही आत्मविश्वाश सोनिया के लिया चिंता का विषय है.
आज सोनिया के वो त्याग की देवी के छवि भी नहीं है और हर तरफ सिंह इस किंग का ही नशा है। इसलिय एक बात आज मेरी लिखले की मनमोहन सिंह वो आखरी कील है गाँधी - नेहेरू राजवंश के ताबूत में जिसका की किसो को अनुमान नहीं जो काम तब नरसिंह राव से न हो पाया वो आज बड़ा जौरदार तरीके से परन्तु सहज बनकर विधाता ने कर दिखाया.
आप मान ले की सोनिया के बसकी अब राहुल की ताजपोशी संभव नहीं हो पायेगी और निश्चित रूप से उसकीकोशिश अभी एक डेड़ साल में शुरू की जायेगी जो आज मेरी कही गई बात को पुख्ता करेगी. सोनिया तो २०१४ में सरदार मनमोहन सिंह का पिछला कार्यकाल और राहुल की जवानी को दाव पर लगाना चाहती थी. आज राहुल का मंत्रिमंडल में न आना कोई उसका त्याग नहीं बल्कि उसकी खिसीयाट है. प्रधानमंत्री से निचेबनकर तो उसीके कार्यकाल में सारी पोल ही खुलजाएगी फिर कांठ की हंडी कैसे चढेगी. और यह ही कांग्रेस के सामने गंभीर प्रशन है.
आज तो मीडिया इन सब को बाबा लोग कहेती फिरती थी और आज एक ही दिन में ये बाबा लोग हिंदुस्तान कामुस्तकबिल बनगए यह बहुत ही हास्यप्रद बात हैं.
ये लोग अपने बाप की सडी गली घोर परिवारवादी परम्परा ही आगे बड़ा रहे है. जींस के ऊपर कुर्ता पेहेन ने से ये इंडिया, भारत को नहीं समझ सकता. और येएनजीओ टाइप नौटंकी करने से भारत चीन या अमरीका का मुकाबला नहीं कर पायेगा. इसका उत्तर भी आपकोशीघ्र मिलजायेगा.
बात थी सोनिया गाँधी के घटते कद की. सोनिया की उस टाइम की त्याग की देवी की नौटंकी अब उसी के गले में पड़गई. आप सोचे की जब कांग्रेस को बहुमत है और काबिल मंत्री मंत्रिमंडल में रखलिया गए तो अब सोनिया गाँधी काकाम क्या है.
पहेले तो सोनिया अपना रुतबा सप्रंग के लालू जैसे लोगो को मनाकर अपनी ताकत का अहेसास दिखाती रहेती थी और हर समये अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहेती थी परन्तु अब तो मनमोहन को हड़काए बिना यह संभव ही नहीं और मनमोहन जो की कमजोर प्रधानमंत्री (घोषित रूप से) नहीं है वो उसका जवाब किस रूप में देंगे वो ही सोनिया के लिए अपनी ज्यादा होशियारी दिखने की परिणिति होगी.
कुछ लोगो के मन में यह लेख पढ़कर दो प्रकार के विचार आएंगे एक होगा बीजेपी की हार से खीज कर लिखा लेख हैं यह. दूसरा ग़ालिब मन बहेलाने का ख्याल अच्छा है.
निर्णय जनता ने सोनिया जी को सुनादिया है जिसको की वो कतई सुनना चाहती थी. नहीं तो
  • कौत्रोची को जल्दी में भागती.
  • सरदार मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री घोषित करती.
  • ६५००० करोड़ के किसानो के लोन माफ़ करती.
  • अफजल, कसाब को रौकती.
  • स्विस बैंक का पैसे वापस लाने की हामी भारती.
  • और फिर नीतिश, चंद्रबाबू नायेद्दु की तारीफ करती.
  • जयललिता की चिरौरी करती.
  • कमसे कम राहुल गाँधी को तो पीछे ही रखती.
अब पांच साल में सब वो करना पड़ेगा अपने ही हाथो से जो गाँधी - नेहेरू राजवंश के सर्वशक्तिमान प्रतिनिधि अपनेआप नहीं करना चाहेगा. यदि इस परिवार को देश के विकास की इतनी ही चिंता होती तो ६० साल में होगया होता. अब सरदार मनमोहन सिंह इस अपने विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है. जो कभी जाने अनजाने लालबहुदुर शास्त्री जी थे. परमात्मा सरदर मनमोहन सिंह को लम्बी आयु दे मेरी परमात्मा से येही प्राथना हैं नहीं तोसंकेत अच्छे नहीं है. क्योंकि जो इस परिवार के कद को छोटा करता नज़र आया उसकी हस्ती मिटा दी गई फिर चाहे वो अपनी मेनका गाँधी ही क्यों न हो. उसी वंश के वारिस को आज हर जगह जहरीला, असभ्य, जाहिल, और पता नहीं क्या क्या कहा जा रहा है. फिर मनमोहन सिंह जी की तो बिसात ही क्या ?

Thursday, May 21, 2009

कुंठित और भूलुंठित हिंदू !

पुरानी शेरवानिया निकल चुकी है। कुछ लोगो ने जालीदार टोपिया और बनियाने निकाल ली हैं। मैं मजाक नही कर रहा हूँ हकीकत बयाँ कर रहा हूँ। इसका जिमेदार कौन वो हैं जा कहेते थे एक हाथ में बीजेपी का झंडा और दुसरे हाथ में राजग का एजेंडा। ये ११६ सीट उसी एजेंडे से आई हैं अब इनको स्वीकार करो।

अब प्रशन ये हैं की हिंदू कुंठित और भूलुंठित क्यों। कारण हैं वो जिसके कारण

वीर सावरकर को नीचा दिखाया गया।

हिंदू महासभा को मिटटी में मिला दियागया।

श्यामा प्रसाद और दीनदयाल जी को स्वर्ग में भेज दिया गया।

संघ पर सम्पर्दयेकता का लेबल चस्पा दिया गया।

बीजेपी का राजगीकरण कर दिया गया।

उप्रोलिखित बाते हिन्दुओ से उनकी आवाज छिनने की कोशिश हैं। तो आप ही बताये हिंदू अपने दिल की बात की यह देश हिन्दुओ का हैं यहाँ हिंदू हितों की बात करो, राम कृषण और बाबा विश्वनाथ के मंदिर की बात करो. इक बार करकर तो देखते इस नपुंसक मीडिया के विरोध के बावजूद आप देश में ४०० सीट से ऊपर निकाल लेजाते. परन्तु दिल्ली में बैठ बैठ कर दिमाग में जाले लग गए. और देश भुला नहीं और न ही स्वामी परमहंस का श्राप उनको दिल का दौरा जो पड़ा था उसका जवाब भी देना पड़ेगा.

आप जरा सोचो तो सही की हिंदू सिख मिले तो सम्पेर्दायक शक्तिया और मुस्लिम किसे के भी साथ मिलजाए तो सात्विक होगया। भाई एसा कौनसा परास का पत्थर हैं मुसलमान जो सर्वग्राही बना देता हैं।

राहुल महजान के चरित्र का सडको पर धज्जिया करदेना और अमेठी काण्ड पर राहुल गाँधी के ऊपर एक लाइन भी नही। उसका भी जिक्र नही की अभिषेक मनु सिंघवी ने अमेरिका में ऍफ़ आई आर क्यों कराइ थी।

वरुण गाँधी जो हिंदू हितों की बात करे उसका एक बहुत बड़े मार्जिन से जितने पर भी मीडिया की जीब में लकवा मार गया परन्तु राहुल गाँधी जिसको ख़ुद नही पता की कलावती की बात पर रात काली करने पर भी कांग्रेस को वहा पर झंडा साफ़ हैं। परन्तु मीडिया का राहुल गाँधी के बारे में मीडिया का निर्लज्जता से भांडगिरी करना उसे सुहता हैं।

बीजेपी भी इक बात अच्छे से गाँठ बांधले की जिस जिस ने हिंदुत्व की लाइन ले थी उस उस को जिताया वो चाहे वरुण जी हो, योगी आदित्य नाथ हो या मुरली मनोहर जोशी जी हो।

और इस देश में हिन्दुओ को पिछलग्गू बनाने का ख्वाब देखने वालो को इस से भी बुरे देखने पड़ सकते हैं. आज मैं कहेता हु की आप २ से १२० कैसे हुए क्या कोई आपने त्याग किया था अरे भाई सीधी सी बात हैं आपने वो बात की थी जिसने हिन्दुओ की आत्मा को छुआ।

आप आज हरिद्वार, तिरुपति, अमरनाथ, अयोध्या, इलाहबाद, में ही हार गए. वाराणसी जोशी जी की वजह से और मथुरा जाटो की वजह से बच गई नहीं तो यहाँ भी झंडा साफ़ था. आज हिन्दू भूलुंठित और कुंठित क्यों हैं, कुछ लोग कहेंगे की नहीं नहीं हिन्दू एसा नहीं है केवल बीजेपी को सबक मिला हैं. नहीं ये बात गलत हैं औसत हिन्दू बहुत दुखी हैं. आप उनसे पूछे तो अपनी पीडा जरुर बतयंगे. अरे मीडिया के खेल में उलझने वालो तुम ५९ कारसेवको के कातिलो को क्यों नहीं पकड़ कर फंसी पर चढा पाए अभी तक. अरे मीडिया के सामने घिघयाने वोलो एक बार जरा मीडिया के सामने आँख मिला कर जरा कड़ी आवाज में बात तो करो जो मीडिया वाले का पैंट में न निकल जाये तो बताना. बीजेपी की अगली १००० पुश्ते भी आ जाये मुस्लमान बीजेपी को वोट नहीं देगा. मीडिया की कितनी भी चिरोरी करलो मीडिया आपको तालिबान साबित करने मैं बक्शे गा नहीं. इसलिय एक बार कम से कम मीडिया के सामने हुँकार तो भर दो. नहीं तो ये तुम्हारे सरे बाजार इसी प्रकार कपडे फाड़ते रहंगे और तुम जी जी और आप करते रहे जाओगे. जरा राहुल गाँधी के सामने वरुण को एक मंच पर लेन की मांग तो करो अभी भारतीय खून और इटली के पानी की औकात पता चल जायेगी. मनमोहन सिंह तो अडवाणी जी की सामने आने के लिए पता नहीं क्या क्या तर्क देदिया. पर जो मीडिया दिन रात राहुल राहुल कह रहा हैं अब चुनाव होगय राहुल व वरुण से एक ही मंच पर जरा बात तो कराओ पता लग्जयेगा की तिलों में तेल कितना हैं।

हिन्दू दुखी इसलिय हैं की हर बार उसकी आवाज बंद कर दी जाती हैं. वो अपनी प्रतिक्रिया दे तो दे कैसे. अब तो अख़बार भी इस हद तक बिकगाये की निर्दलीय या छोटी पार्टी के उमीदवार का नाम भी चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलता है की यह भी कोई आदमी चुनाव लड़रहा था. इतनी निर्लाजता मीडिया के दिखने पर हम बीजेपी से ही तो कोई उम्मीद करंगे परन्तु उसने भी कांग्रेस की डुप्लीकेट कॉपी बनना स्वीकार करलिया तो जो अडवाणी जी की सभा में सुनने के लिया दो दो दिन भूखा रहा करता था वो अब भूलुंठित या कुंठित न हो तो क्या हो. इस हिन्दू ने तो कांग्रेस टाइप भेडिये जो बीजेपी में निचे निचे भगवा कुर्ते पहेने लोगो को भी स्वीकार करलिया था। जो एक एक मोबाइल सेट पर अपना ईमान बेच दे इस आस में की हिन्दुओ की कोई आवाज तो हो. इस धरमनिरपेक्षता नामक निर्लज्ज, पिशाची विधवा विलाप तो ख़तम हो. इसी हिन्दू ने अडवाणी जी की रथ यात्रा मैं घर घर से माँ बहेनो ने रोटिया बनवा बनवा कर भेजी थी बिना ये जाने की यह अडवाणी हैं कौन परन्तु इस आस में की जो भी हैं वो हमारी एक हिन्दू होने की पहचान देगा जो इस झूठे और ढोंगी संविधान में दबा दी गई है. इस संविधान जिसका का ४२ बार बलात्कार इसी कांग्रेस ने कर दिया उसके अन्दर हिन्दू कही घुटकर अपनी सिसकियों को आवाज बीजेपी के रूप मैं देना चाहता हैं. किसी अटल जी या अडवाणी जी को यह शीर्ष पर पहुचना अपनी अभिव्यक्ति देना ही हैं. राजनाथ जी को धोती में देखकर गाँव का मेरा किसान भाई अपनी छवि ही देखता हैं. नहीं तो लैपटॉप और टाई में दिल्ली में बैठे इन नेताओ में आम ग्रामीण हिन्दू अपनी धूल भरी आँखों से तो देश १९४७ में दो देश गवां देने के बाद भी आम हिन्दू साम्प्रदायक ही है। इसलिय जो इसे बीजेपी की हार कह रहे है वो वास्तव में अपने आपको धोखा दे रहे है क्यूंकि बीजेपी के रूप मैं उस आम हिन्दू येही जानता हैं की अडवाणी आयेगा और राम मंदिर बनेगा . उसको धोखा देना अपनी दोनों खुली आखो में खंजर घुसाना हैं। वो जानता हैं की 1990 की गर्मिओं में एक पतला सा दिखने वाला वियक्ति धोती पहेने अयोध्या में राम का मंदिर बनाने के लिया मेरे पास आया था . उसको नहीं पता की वेबसाइट क्या है या स्विस बैंक के पैसे वापस आएंगे या नहीं वो बैठा है की अडवाणी कहकर गया था मंदिर बनआऊंगा वो अभी तक नहीं बना।

बीजेपी का आज नहीं एक हजार साल के बाद भी इसी का जवाब देना होगा की राम का मंदिर बना है की नहीं क्योंकि जितनी भी मर्यादाओ की बात करलो भगवन श्री राम भी आज तक इस बात का जवाब नहीं दे पाए की जब लंका जाकर सीता को लेकर आए तो इक धोबी के कहेने पर सीता को अयोधा से निकला क्यों? हजारो वर्षो तक न तो इसका उतर कोई दे सकता और न ही इस सृष्टि पर भगवान श्री राम जनम लेकर उतर देपयेंगे। क्योंकि क्यों तो उन्होंने लंका जाने के लिया इतने महेनत कर वानरों के सेना एकत्र की और फिर जब सीता जी आगई तो क्यों उसे निकाल दिया धोबी के कहेने पर। ये सवाल पूछा जाता रहेगा और रामयण पढ़ी जाती रहेगी। यहाँ भी वो कौन धोबी हैं जो राम मंदिर का मुद्दा निकाल दे रहा है एजेंडे से। उसको देखना होगा अटल जी की सरकार इसी लिया बनी थी परन्तु मंदिर नहीं बना। राम अयोध्या आए रामराज्य भी आया परन्तु सीता चली गई। बस राम के पास इसका जवाब नहीं। परन्तु बीजेपी अपने का जवाब देसकती हैं। ये हिंदुस्तान की जनता हैं जब राम से सवाल पूछ सकती है तो आप से क्यों नहीं. अडवाणी जी जवाब तो देना होगा. आप नहीं तो आने वाली नस्ले क्योंकि प्रशन अपनी जगह खडा है। इसका जवाब मिलते ही अपने आप ११६ से ४०० सांसद की गुथी सुलझ जायेगी बस यह देखना हे कब .

नहीं तो तब तक हिन्दू कुठित और भूलुंठित है।

Tuesday, May 19, 2009

वो इटली से आई त्याग की देवी और हम राक्षश।

बीजेपी और शिवसेना को छोडकर कोई भी? चुनावो के दौरान यह एक बयान दिग्गी राजा का आया था। खेर अबतो कहेना ही क्या अब तो सच में दिग्गी राजा ही बनगए पक्ष में उप्र परिणाम जो अगये।
उस बयान की अगर जो मैं बात करू तो क्या यह हिन्दुओ के मुंह पर राख मलना नहीं है। हिन्दुओ के देश में रहकर उन्हीको न केवल गाली देना बल्कि सरेआम उनकी इज्ज़त उतारकर चौराहे पर बेइज़त करना नहीं है. सरेआम कांग्रेस और सप्रंग का एलान की बीजेपी व शिवसेना छोड़कर बाकि सब सेकुलर हैं। हिन्दुओ की आस्था, असिमिता से खेलना नहीं है। यह तो जब की बात हैं परन्तु अब जब सरकार ही बनगाई तो अब तो बीजेपी वाले राक्षश होगए। ये दो कोडी के वाम दल जो अपनी इज्जत झोलों में लेकर दाडी बढाकर दुसरे देशो के टुकडो पर पलते हैं। गुजरात को रोने वाले और सिंगुर और नंदीग्राम पर पिशाची अट्टहास लगाने वाले भी सेकुलर है । शिव सेना और बीजेपी को जो देश की आत्मा का प्रतिनिधित्व करते है। अब भले ही २५७ सांसद हो परन्तु करते तो येही है सोनिया जी या लाल नेता तो करने से रहे।
हाँ तो जिनहोने इन दोनों पार्टियो को चुना हैं। उनका गोली मार दो, फँसी पर चढा दो, सरेआम चोराहे पर सर कलम करवा दो येही इनकी सजा हैं। अरे मेरे सेकुलर मित्रो वेश्या भी इसतरह का बर्ताव नहीं करती। उसका भी सम्मान होता है। परन्तु सेकुलेरो जैसे हिजेडे नंगे होकर मर्दाना होने का सबूत दे रहे है।मुझे माफ़ करो की इन हिजडो के देश में मैं भी पैदा हुआ हूँ।
मैं कभी कभी सोचता हूँ कही पर भी पुतना, ताड़का, शूर्पनखा, सुरसा के बच्चो का जिक्र किसी किताब में नहीं है।पता लगा की पूतना ने ये जने है और उसकी संताने सनातन कल से सेकुलेर ( तथा कथित) के नाम से जानी गई हैं।
कोई इनसे प्रशन करे सुप्रीम कोर्ट से आरोपित होने वाली तीस्ता सीतलवाद को किसी ने भी कुछ नही कह। अब इस धर्मनिरपेक्षता का क्या करे। जिसने सुप्रीम कोर्ट की धजिया उड़ने वाली को भी अपने गैंग में रखा हुआ है।
जो भी टिपण्णी करे वो पहेले तीस्ता सीतलवाद के ऊपर जवाब जरुर दे।
भाई अब तो डर लगता हैं राजा, युवराज और देवी की सरकार है मन में आए तो किसी भी बात पर राज्य सरकारे भंग करके सब पर प्रतिबन्ध लगा दे। जय हो कम से कम पञ्च साल तो। यदि इस से पहेले तो फिर चमत्कार ही माना जाएगा। कितना बड़ा मैनेजमेंट है भाई की प्रभाकरन तक की ख़बर चुनाव में छुपा कर रखी।
  • कम से कम अब तो मान ही ले की सच्चर रिपोर्ट अब लागु होगी।
  • अफज़ल कश्मीर में विधानसभा चुनाव लडेगा।
  • कसाब की सरबजीत की अदलाबदली होगी।
  • कश्मीर को स्वायत्त मिलेगी।
  • बाबरी मस्जिद दोबरा बनेगी।
  • और कमसेकम पाँच साल इस्लामिक आतंकवाद तो अखबारों से गायब ही रहेगा।
  • बस भइया साध्वी प्रज्ञा और प्रौहित का क्या होगा ये जरुर बता देना।
कुछ करो न करो इनको सरे आम फँसी जरुर चढा देना क्योंकि बम विस्फोट में अपनी ही मोटर साईंकल का इस्तेमाल जो किया।
और हा गुजरात दंगो जिसमे ४००० सिख भाई मरे गए और एक भी दंगाई नही मरा और न ही किसी एक को सजा हुई। वो अध्याये तो खुद मनमोहन सिंह जी ने ख़तम कर दिया भाई इस पर राजनीती अब बंद होनी चाहिय क्यूंकि देश की प्रगति में बाधक हैं। परन्तु गुजरात में जहाँ पर ८०० मुस्लमान और २५० हिंदू मरेगाये और जिसमे दो मंत्री और पचासों जेल में है और ट्रेल चल रहा है, सुप्रीम कोर्ट बारीकी से मामला राज्य और राज्य के बहार भी देख रहा है। जिस गुजरात में मुसलमानों को कोई शिकायत नही है। उस पर राजनीती बंद नही होनी चाहिय। सनातन काल तक चलनी चाहिय । चलती रहेनी चाहिय चाहे तीस्ता सीतलवाद (कांग्रेस से पदम् भूषण से सम्मानित) गरभवती स्त्री के बच्चे को पेट में से फाड़कर निकाल कर मार देने की सुप्रीम कोर्ट में झुटा हलफनामा दिया हो, झूटे साइन कराये हो। को सम्मानित उपन्यासकार की कटागिरी में किया था या स्मज्शाश्त्र में पता नही। परन्तु जब तक मोदी की सात पुश्ते रहेगी उस पर राजनीती चलती रहेगी
क्योंकि संविधान में सेकुलर शब्द का संसोधन इसिलिया तो किया गया है। की आप देश पर राज करे और देवी से परिभाषित हो और हम राक्षश कहलाये जाए।

अडवानी जी की हार हिंदुत्व की विजय ?

इस पर प्रशनवाचक चिन्ह इसलिय बनाया है की कांग्रेस की सरकार आने पर आँखों में से आंसू छलक गए। मेने इस पर सोचा यदि अडवाणी जी जीत जाते तो क्या होता। क्योंकि पिछले तीन दिन में मेने हजारो ब्लोगों और आदमियों से सुना (बीजेपी पक्ष के) जो मेरी ही तेरह व्यथित थे मेरा विश्लाशन कुछ इस प्रकार से से है -
  • बीजेपी यदि इस बार जीत जाती तो यह हिंदुत्व की या बीजेपी की जीत कभी न होती इसे सिर्फ और सिर्फ अडवाणी जी की ही जीत माना जाता।
  • बीजेपी का औपचारिक रूप से कांग्रेसीकरण होना शुरू हो जाता।
  • जिन्न्हा का औपचारिक रूप से महिमा मंडन शुरू हो जाता।अडवाणी जो उद्धरण बना कर हर बीजेपी और आने वाली कई नस्लों को जीत का येही फार्मूला मिल जाता। और इसके विकृत रूप ही सामने आते।
  • धरा ३७० भारत में स्थाई हो जाती।
  • हिंदुत्व का नाम ले वाले को उग्रवादी माने जाना लगता क्योंकि अडवाणी जी जब नेतृत्व कर ही रहे है तो इसके आगे को तो लोग और मीडिया स्वीकार ही न करता।
  • भारत में अगले पञ्च साल राजग के नेतरेत्व में संघ पर जबरदस्त दबाव होता हो सकता था संघ को भंग करने की सलहा भी कुछ राजग के उत्साहित कार्यकर्ता दे देते।
  • बीजेपी को हिन्दुओ को दुत्कारना ही कांग्रेस की तरहे अगले कम से कम बीस साल सत्ता पाने का फार्मूला मिल जाता।
  • बीजेपी की वोटर के रूप में भारत में एक बहुत ही विकृत रूप की कांग्रेस की डुप्लीकेट कॉपी सरकार दिखाई पड़ती।
  • बीजेपी के अन्दर एक बहुत बड़े विभाजन की शुरुवात होजाती।
  • आज कम से कम हम दोबारा से राम मंदिर, धरा ३७० की बात तो करसकते है परन्तु अडवाणी जी नेतरेत्व में सरकार बनने पर यह तो संभव ही नहीं था।अडवाणी जी ने इस बार जिस तरह से राम नाम से परहेज किया हैं वो बहुत ही आश्चर्य जनक है।
  • राम कृष्ण बाबा विश्वनाथ का नाम लेने वाला सरकार में शायद ही कोई होता।


एसा हुआ क्यों की अडवाणी जी हारे -

  • मैं एक घटना का जिक्र जरुर करुंग अभी एक साल पहेले बीजेपी के युवा मोर्च ने अमित ठाकरे के नेतृत्व में दिल्ली में एक रैली की थी जिसमे अडवाणी जी, राजनाथ जी जैसे नेता सभी थे। अमित ने बड़े ही सादगी भावः से अडवाणी जी को परम्परा के अनुसार भगवन शंकर का त्रिशूल मंच पर दिया और फोट खिचवाने का अग्रेह किया। अडवाणी जी की भावः भंगिमाये बता रही थी की इस अग्रेह की बहुत बड़ी सजा अमित को मिलेगी। क्योंकि अडवाणी जी अपना त्रिशूल के साथ फोटो खिंचवाना अपने लिया खतरनाक मानते थे।
  • दूसरी घटना अटल जी की सरकार में अडवाणी जी उपप्रधानमंत्री थे जब शेकेर्स एंड मुवेर्स पर शेखर सुमन ने एक इंटरव्यू लिया तो उसमे अडवाणी जी से उनकी पसंद की हेरोइन पूछी तो अडवाणी जी ने जवाब दिया उस समय जोगेर्स पार्क एक पिक्चर आई थी उसकी नायका (नाम मुझे मालूम नहीं इसलिय पिक्चर का जिक्र कर रहा हूँ ) मुझे सुन कर इस बात से इतना दुःख हुआ की अपनी बेटी से भी छोटी एक अदाकारा को यह व्यक्ति अपनी पसंद बता रहा है। इस बात का जिक्र करने का मतलब यह नहीं की अडवानी जी के चरित्र के ऊपर मैं कुछ कहेने की गुस्ताखी कर रहा हु। कभी नहीं क्योंकि मैं जानता हु अडवाणी जी पर इस तेरहे की टिपणी करना न केवल अशोभनीय हैं परन्तु सूर्य पर थूकना है। जिस बात को मैं इंगित करना चाहता हु वह यह हैं की अडवाणी जी अपनी छवि बदलने के और अपनी स्विकारियता बढ़ने के कितने उत्सुक थे। ये ऊपर के दो उद्धरण उपयुक्त है अडवाणी जी केउनके सलाहकार और अडवाणी जी के ऊपर उनके प्रभावों के। जब की अडवाणी जी सिर्फ और सिर्फ अडवाणी बनके चुनाव लड़ते तो हिंदुस्तान की जानता उनकी झोली भर देती और हिंदुस्तान के सब से ऊँचे तखत पर बैठा देती। क्यूंकि जानता उनकी तपस्या का सम्मान करती है। परन्तु चाल बदलना हिन्दुतान की जानता पसंद नहीं करती। पता नहीं किनके कहें पर जिमखाना चेलेगए अन्यथा एक सज्जन के रूप और संघर्षशील वियक्ति के रूप में लोग पसंद करते थे। अब आप सोचो के बाला साहिब या मोदी जी हरी पगड़ी पहेन कर या जलीदर मुस्लिम टोपी पहेन कर भाषण दे तो उनको लोग हास्यप्रद नहीं मानेगे। अरे भाई ये सभी हिन्दू हृदय सम्राट हैं अब येही उलट जाये तो क्या जानता माफ़ करगी। अडवाणी जी के द्वारा मुरली मनहोर जोशी जी के साथ गुटबाजी सजग हिन्दू को बिलकुल नहीं सुहाई। इस से स्वार्थ की बू आई। गठ्बंदन बीजेपी को शोभा ही नहीं देते अब हरियाणा में ही लेलो। चौटाला हरियाणा में बिलकुल भी स्विकरिया नहीं है. उसकी छवि बहुत ही बहुत ही घटिया हैं. आज बीजेपी बिना चौटाला के लड़ती तो निश्चित रूप और दो सीटे लेलेती।
  • दूसरा गटबंधन और अपनी लीडरशिप ख़तम कर देती हैं जैसे हरियाणा में, उडीसा में, पंजाब में और अब बिहार में कर रही है। साझेदारों के चराण भाट बनने और लाभ नहीं मिलता और अपना ही वोटर अपमानित और कुंठित हो जाता है। अब बीजेपी में उडीसा में करने लायक हैं.

इस आशा के साथ की एक दिन लालकिले पर भगवा फेहराया जायगा। जय भारती.