Tuesday, March 15, 2016

दो कौड़ी के देशद्रोही लोगो की औकात ही क्या है ??

देखो मित्रो आर्मी, पुलिस, स्वतंत्रता के सिपहिओ से भी बड़ा और जोखिम भरा काम आज देश के नागरिको के सामने है।  जरा ध्यान से गौर करो की आर्मी को पता है उसके दुश्मन कौन है बस बन्दुक उठाई और लगा दिया निशाना , पुलिस को मालूम है की दंगाई कौन है पकड़ा तो पकड़ा नहीं तो लाठी चला दी या गोली मार दी , स्वतंत्रता से पहले आजादी की लड़ाई अंग्रेजो से लड़नी थी तो सामने गोरी चमड़ी के लोग थे तो लेली उनसे आजादी भी।

परन्तु आज क्या ????

देश के अंदर ही अपने को पासपोर्ट और राशन कार्ड पर देश का नागरिक बगल में रहता बेरोजगार सा दिखने वाला अपना भाई ही देश के टुकड़े टुकड़े करने की कसम खाता फिर रहा है। अब हर तरह से भारतीय शकल सूरत से परन्तु दिमाग से देशद्रोही जिसके पास वकीलों की फौज , एनजीओ का विदेशी पैसा , विदेशी पैसे पर पलता मीडिया का दुलारा।  

अब एक भारतीय देशभक्त के सामने इन देशद्रोही से लड़ने की चुनौती है। 

एक तरफ बोलते है की भारत की आजादी में हमारा भी योगदान है, कारगिल की लड़ाई में हमारा भी योगदान है , दूसरी तरफ उसी देश के बहुसंख्यक हिन्दुओ से नफरत , उनकी गो माता और देश की भारत माता से नफरत , वन्दे मातरम का बहिष्कार , योग दिवस पे कटाक्ष , मंदिरो पर कब्जे , मेरी समझ नहीं आता तो किस देश से यह प्यार करते है किस देश को पूजते है किस भारत माता को डायन कहते है और किन लोग पर शासन करना चाहते है। शायद लड़ाई का मैदान और विरोधी का जहर आपने देख ही लिया। 

मित्रो यह लड़ाई उन सब लड़ाइओ से निराली और अलग जहाँ पर दुश्मन सामने है और अलग है।  देश में अपने ही देश के प्रति इतना विष तो कैसे करेंगे मुकाबला ?


  • अपना राष्ट्रीय चरित्र बहार लाना होगा।  उसका स्वर्जनिक प्रदर्शन करना होगा की आप अपने देश से कितना प्यार करते है। 
  • देश में राष्ट्रवादी विचारधारा के लोग ज्यादा है या देश द्रोही इसको बताना होगा। 
  • हर जाती और धर्म से ऊपर उठ राष्ट्र को सर्वोपरी मानना होगा 
  • बच्चो में राष्ट्रवाद का चरित्र गढ़ना होगा। 
  • माताओ को अपने पुत्रो को राष्ट्रनिर्माण में लगाना होगा। 
  • व्यापारिओं को क्षुद्र स्वार्थो से ऊपर उठ राष्ट्रनिर्माण में भागीदार बनाना होगा 
  • गलत को गलत और सही को सही बोलने का साहस करना होगा 
  • राष्ठ्रीय त्योहार और भारत के अपने त्योहारो पर नागरिक प्रेम प्रदर्शित करना होगा 
  • मातृभाषा और राष्ट के लिए समय देना होगा 
  • अपने आस पास परिवार में राष्ट्र विरोधी शक्तियों को पराजित करना होगा 
  • स्वर्जनिक बहस में अपना स्वर ऊँचा करना होगा। 
  • राष्ट्रविरोधी तत्वों को कानून के हवाले करना होगा 
  • व्हाट्स आप ग्रुप या अन्य जगहों पर राष्टविरोधी बातो का जवाब देना होगा 
  • देश विरोधी मेसेज से आँखे नहीं फेरनी बल्कि उसका उसी ग्रुप में जवाब देना होगा। 
  • राष्ट्र से जुड़ी हर छोटी छोटी बात पर अपनी मौजूदगी दिखानी होगी 
  • राष्ट्र का अपमान अपना निजी अपमान मानना होगा 
  • होली दिवाली हिन्दू त्योहार न रहकर राष्ट्रिय त्योहार की तरह मानना होगा। 
  • बहुत हो चूका मेरा मेरा अब हमारा कहना होगा। 
  • इन दो कौड़ी के देशद्रोही लोगो की औकात ही क्या है जो हमें आजादी पाठ पढ़ाये हम उस धर्म को मानाने वाले देशभक्त  है जिनकी आत्मा आजाद है आजाद थी और आजाद रहेगी।
  • कोरी बकवास और एक्टिंग के नारो से देश की घायल शरीर को हम अपने खून से जीवित रखेंगे। गीता का रस पीने और कृष्ण को भजने वाले हस्तिनापुर के लिए कौरवो का जवाब देने के लिए  अपने को पूर्ण समर्पित कर देंगे। 
  • देश के लिए  मरना नहीं बल्कि तिरंगे के साथ जीना होगा और १२० करोड़ लोगो को राष्ट्र मानते हुए अपने हस्तिनापुर के सिंहासन की रक्षा करनी होगी। 
  •  यह मिटटी और आसमान ही नहीं हर नागरिक के अंदर राष्ट्र को देखना होगा।  

कौन नहीं जनता की कुछ नालिओ के किनारे सभ्यता विकसित नहीं होती बल्कि गंगा के किनारे सभ्यता विकसित होती है।  हमें नदी बनकर इन नालीओ का जहर पीना होगा और हलाहल शिवशंकर की तरह इन नालीओ  के जहर का पचना होगा। 

यह एक एक कौड़ी पर बिकने वाले देश द्रोही पाञ्चजन्य के शंख की ध्वनि में काफूर हो जायेंगे। भरत की सिंह गर्जना से धूलधूसरित हो जायेंगे। तिरंगे को ठगने वाले ,वन्दे मातरम को मना करने वाले ढोंगी विक्रमादित्य सरीखे हमारे सुप्रीम कोर्ट से पराजित होंगे ही। 

हमें सयम से काम लेना होगा अपने आस पास राष्टृवाद का दीपक जलाना ही होगा। यह कठिन जरूर है पर उस चाणक्य काल से कठिन नहीं जिसमे वो एक शिक्षक मात्र ही था और चन्द्रगुप्त उसको ढूँढना पड़ा आज तो राष्ट्र में फिर भी असंख्य देशभक्त है जिनको बस अपनी भावनाओ का स्वर्जनिक पर्दर्शन भर करना है।

देश धुन की डमरू की थाप पर बस शंकर की तरह एक बार नाच भर लो इनका जहर तो हलक में से अपने आप बहार आ जायेगा।

मुश्किल है परन्तु असंभव नहीं। उस से तो अच्छा ही है जिसने कायरो के तरह दब्बू जीने से बेहतर राष्ट्र के लिए कुछ सांसे भर ले ली हो।  जिस के लिए एक बार रामभक्ति से भी ऊपर राष्ट्र भक्ति हो।