Thursday, January 14, 2010

हिन्दू राष्ट्र से दिक्कत किसे है (भाग -२)!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

अभी तो कोई भी हिन्दू को तो भारत राष्ट्र की शक्ति भी मानाने को तैयार नहीं है. कोई रहमान तो कोई मदर टेरेसा को तो कोई शाहरुख़ को तो कोई ऍम ऍफ़ हुसैन को भारत का आईकोन बता रहा है. अभी अरविंदो , विवेकानंद, दयानंद को तो कोई पूछने को तैयार नहीं है. असल में बात ही मानसिक रूप से सेम्लेंगिक बनाने की. अब कल का बच्चा यह रहमान वगेरह हमारा आइकोन कैसे बन सकता है जब की भारत कम से कम ५००० वर्ष पुराना राष्ट्र तो है ही. अब समझने के बात यह है की देश में कांग्रेस खाने को क्या दे रही है और मीडिया पूछती क्यों नहीं की "कांग्रेस खा गई शक्कर पी गई तेल दिखा रही है अपना खेल". सरकार चल रही है या बाबे की की चिलम जिसमे आम आदमी तम्बाखू की तरहे सुलग ही रहा है इस भारत के आम आदमी का होगा क्या?
आज हिन्दूस्थान में संसार का सबसे बड़ा आयोजन हो रहा है कुम्भ के मेले का हरिद्वार में. अभी मेरा ब्राज़ील जाना हुआ वहा आदमी को अंग्रेजी भी अच्छे से नहीं आती परन्तु वह व्यक्ति मुझ से कुम्भ के मेले के बारे में पूछता है. मेने सोचा यार सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह से यदि ये प्रशन पूछ लिया तो जवाब एक ही होगा हम तो अजमेर शरीफ और ताजमहल के ही बारे में जानते है कुम्भ का मेला तो सोनिया को १२ साल पहले इलहाबाद में याद आया था जब प्रयाग में डुबकी लगा कर हिन्दू का मन मोहने और देश की बहु साबित करना था वो नाटक तो राहुल बाबा की भी करेंगे.
अब तो देश के सेर्वोसरा है क्या चिंता और फिर बावले हिन्दू तो वोट देंगे ही. अच्छा देश का मीडिया जो दिल्ली में रहेता है २०० किलोमीटर दूर हरिद्वार से इसे लाइटली ले रहा ही जैसे की कोई बगल में ही कुछ एक लोग आरहे है. नहीं मालूम की १० करोड़ लोग हरिद्वार में आने वाले है तेरे ही देश की १०% जनसँख्या यह आयेगी. परन्तु मीडिया को अपने झुनझुने बजाने से फुर्सत ही नहीं फिर सोनिया ने पैसा ही इतना दे रखा है की घर के कुत्ते खा खा उलटी कर रहे है फिर पदम् भूषण और न जाने क्या क्या अवार्ड अलग से दिया जा रहे है सो कोन इस कुम्भ को कवर करे. क्या केंद्र सरकार ने एक भी प्रचार किया या उस तरहे से ध्यान दिया जिस तरह से सोनिया अपने फोटो लगाती फिर रही है देश की चतुभुज राजमार्ग पर जो अटल सरकार ने बना कर दिया था. अभी भी दिल्ली से हरिद्वर की सड़क ४ लेन नहीं हुई जैसी दिल्ली - आगरा, दिल्ली - जयपुर, दिल्ली - अजमेर, दिल्ली - फेतेपुर सिकरी. अब आप देख लो की हिन्दू को देश में हिन्दुओ के आयोजन में संसार के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव जो बहेरी और गूंगी दिल्ली की नाक के निचे हो रहा है की कितनी चिंता है . दिल्ली से गाजियाबाद जाने में ही आपको पसीने आजायेंगे फिर सबसे पहेले स्वागत होगा गाजीपुर चौक पर अरे दिल्ली से हरिद्वार गाजी का क्या काम. मतलब हिन्दू को कत्ल करने वाले को हरिद्वार के रस्ते पर पहेले सजा कर रखा है.
मित्रो सुबहें अखबार पढने पर यह गुस्सा था ठीक है छोड़ो. बात है हिन्दू राष्ट्र से दिक्कत किसे है? हिन्दू राष्ट्र से दिक्कत सेकुलर का टोकरा ढ़ोने वालो और प्रगतिशीलता की भडवागिरी करने वालो को ही है. इसमें तो कोई शक नहीं की आज हिंदुस्तान को एक विवेकानंद या दयानंद या एक अरविंदो चाहिय ही. क्योंकि कुछ अति उतेजक हिन्दू भाई भी क्रिया की प्रतिक्रिया में गलत तरीके से हिन्दू धर्म को परिभाषित कर रहे है. यंहा यह कहना इसलिय भी वाजिब है की हिन्दुओ में पर्दा प्रथा कभी थी ही नहीं जैसे जाति व्यवस्था कभी थी ही नहीं. परन्तु कुछेक हिन्दू इन्ही चीजो को परम्परा कहे कर सभी हिन्दुओ पर थोपते है जो सरासर गलत है क्योंकि यह लोग एक जाति का दुसरे जाति में विवह करने को हिन्दुओ धर्म के खिलाफ मानते है. अब इनको भी तो समझाना पड़ेगा की भइया १००-५०० साल के अँधेरे इतिहास को हिन्दू धर्म की परम्परा नहीं माना जा सकता. अब मैं इसे समझाऊंगा तो कोई मानेगा नहीं परन्तु इसी बात को रामदेव जी कहेंगे तो सब मानेगे. तो भइया रामदेव जी आप ही समझो दो.
तो भइयो कुछ एक दिक्कत तो अपनी भी है अभी कल भोपाल में ही कुछ एक हिन्दू मित्र तब्लिग्यो की तरह व्यवहार कर दुकानदारो से कुछ एक सामान पर आपत्ति कर उनको धमका रहे थे. अब इनको भी तो समझाना जरुरी है की महखाने में बैठ कर दूध पिने वाले को भी बहार से गुजरते आदमी शराब ही मानेगे तो इस प्रकार के व्यव्हार से आपको लोग तबलीगी मान लेंगे. इस प्रकार कर्कश श्लोक बोलने वाले कितने भी ज्ञान की बाते करे कोई भी उनसे हवन नहीं कराता तो दोस्तों मार्केटिंग का युग है थोडा सा सभ्य बनकर कुसंस्कृत लोगो को संस्कृति सिखाओ. डंडे लेकर सभ्य मत बनाओ नहीं तो सब उल्टा होजायगा बल्कि होगया. तुम्हारी कोई बिसात नहीं दोस्तों इसी गुस्से के कारन मेरी आराध्य और पूर्वज परशुराम को कोई नहीं पूजता बल्कि कृष्ण और राम को सब पूजते है क्योंकि मार्केटिंग का युग है (सही सन्दर्भ में लेना). भगवन परशुराम की अच्छाइया समझने की न तो शक्ति है और न समझ इस लिया उसको अभी छेड़ो ही मत. क्योंकि अभी राम मंदिर तो बन नहीं पा रह और एक नई तान और छेड़ने का कोई तुक है भी नहीं. अन्यथा तो हिन्दू द्रोही इसको भी एक हतियार बना लेंगे.
आज हिन्दू द्रोहियो के पास पैसा है और पवार है जिसके बदोलत वो हिन्दू राष्ट्र के बीच रोड़ा है इसका इलाज कुछ भी नहीं. कोई सोचता है बीजेपी को वोट देकर हिन्दू राष्ट्र भारत बन जायगा यह भी एक भ्रम ही है. क्योंकि यह भी एक साधन ही है साध्य नहीं. किसी सरकार बनाने से लाभ तो मिलेगा परन्तु दूरगामी जब तक नहीं होगा जब तक देश में इस बात को लेकर समझ नहीं होगी. यदि लोगो से वोट लेकर बनाने वाली सरकार से आप यह समझते है की वो सरकार देश के भले के लिया है और वो देशवासियो की उन्नति ही करेगी तो आप एक बहुत बड़े भ्रम के शिकार है. अब इसको कुछ एस प्रकार से ले की कक्षा के सभी छात्रों से अपने लिया एक शिक्षक चुनने के लिया कहा गया है तो क्या आप समझते है वो एक उच्कोटी शिक्षक चुनेगे. नहीं उनको नहीं पता वो तो एक हसौड़ या मसखरा चुनना पसंद करेंगे जिसकी कक्षा में वो मस्ती करसकते हो. अरे नहीं समझ आता तो एक बार आप अपने जवानी के दिन याद कर लो. क्या आप रोजमर्रा की मजदूरी में लगा रिक्शा वाला (माफ़ करे में उसके कर्म का अपमान नहीं कर रहा) से उम्मीद करेंगे की मनमोहन सिंह की शिक्षा और सोनिया की देशभक्ति को परखे और एक आद प्रतिशत जो मौका है वो भी बिकाऊ मीडिया बर्बाद कर दिया. इस बिकी मीडिया से वो देश के हिन्दू और सेकुलर होने को चुनेंगे. और यदि आप यह समझते है तो आप भी बहुत बड़े गुनहा के सहभागी बन रहे है. देश हिन्दू है और रहेगा कलेवर ही बदलने के जरुरत है बिकाऊ मीडिया और भ्रष्ट नेता इस को सवीकार नहीं करेंगे परन्तु गंगा में १० करोड़ लोग सोनिया या मनमोहन से पूछ कर नहाने नहीं जा रहे है. हजारो लोग अपनी जेब से पैसा भरकर मानसरोवर जा रहे है. बात हिन्दू राष्ट्र बनाने या न बनाने की नहीं है बात इस को सवीकार करने की है जब तक यह पैसे का गुबार नहीं छांटेगा तब तक किसी को यह समझ नहीं आयेगा. देश को समझदार नेता नहीं हिन्दू नागरिक चाहिय. देश के हिन्दुओ को अपने को हिन्दू कहेने के लिए एक रीड की हड्डी चाहिय और यह रीड की हड्डी ही नहीं मिल पा रही. कभी कभी मेलो और धार्मिक आयोजनों या कुछ फिल्मो के जरिया इसका संकेत जरुर मिलता है की हिन्दुओ में अपनी पहचान की ललक तो है परन्तु आत्मविश्वाश नहीं इसलिय पहले राष्ट्र के आम आदमी आम हिन्दू को समझ होनी चाहिय तब देश में हिन्दू अपने को कहेने का स्वाभिमान आयेगा और यदि और क्रूर शब्दों में बोलू तो हिन्दू होने के लिए कुछ मिलना चाहिय. अपने गाव से प्यार रखने वाले अपने प्रदेश से प्यार रखने वाले अपनी जाति से प्यार रखने वाले अपने को हिन्दू होने पर वो अहसास नहीं करा पाते तो असल में जड़ तो यह ही है की ऐसा क्यों. एसा इसलिय की क्या कुछ मिलेगा? यदि हाँ तो में भी हूँ. और इस हाँ और न ने ही सारी गुंजायश छोड़ रखी है. इस हाँ - न के बीच भारत और हिन्दू की आत्मा इंडिया और सेकुलरों हाथो गिरवी है इसी लिया त्याग की देवी हमे त्याग सिखा रही है और हम अपने रंग को पोतने अपनी धोती और तिलक को छुपाने में व्यर्थ लगे है.
सावरकर के पुत्रो अपनी बात को पहुचाने के लिया पहेले अपने बच्चो को समझाओ नहीं तो प्रमोद महाजन सारी जिंदगी बीजेपी में रहेने के बाद भी राहुल महाजन देकर गया है और गाँधी परिवार की मेनका ने वरुण जैसा तेजस्सवी पुत्र दिया है. इसलिय बड़ी बात अपनों को समझाने की है वहां बहार निकल कर दुनिया को समझाने की नहीं है. चलो शुरुवात अपने से करते है मैंने भी की थी मेरी पुत्री ने स्कूल में वोही जवाब दिए परन्तु स्कूल से मेसेज अगया की पुत्री उत्तर गलत दे रही है. मेने बताया विमान का अविष्कार तो ५००० वर्ष पूर्व ही होगया था तभी तो रामायण में राम सीता जी के साथ लंका से अयोध्या आते है परन्तु स्कूल बोला विमान का अविष्कार तो राईट ब्रोद्र्स ने किया. अब बताय की कितना मुश्किल और जिसने इस को मुश्किल बनाया वोही हिन्दू राष्ट्र नहीं चाहते अब आप बच्चे के सामने उसीके स्कूल को दुष्ट तो कह नहीं सकते. और यह ही स्वांग हर हिन्दू के हीन बनाने की गाथा है. इस वजह से हिन्दू हिन्दू नहीं और इंडिया भारत नहीं अत: हमारा राष्ट्र हिन्दू राष्ट्र नहीं बन सकता क्योंकि आप को अपने ही घर में लड़ना है और यह अंतहीन लड़ाई है जो अपने से लड़नी परन्तु फूलो से न की ताकत से. और ये लड़ाई कोई सरकार नहीं लड़ सकती. इस युद्ध को हमपर थोपा गया है गाँधी नाम के शाखंडी के रूप में जिस पर आप हतियार भी नहीं चला सकते और युद्ध हारना भी नहीं चाहते. तो फिर लड़ो जिस तरहे से में अपनी पुत्री को समझा रहा हूँ और लड़ व्यवस्था से रहा हूँ. तो क्या आप नहीं समझते हो वैदिक हिन्दू पढ़ा और समझा कुछ रहा है और हो कुछ रहा है . बड़ा मुश्किल है! तो फिर भरो स्वांग और करते रहो नौटंकी और भटकते रहो मृग मरीचिका में.

अरे इस गाँधी (व्यवस्था) शिखंडी ने भीष्म बना कर रख दिया तो दोस्तों हिन्दू राष्ट्र के चाहने वालो तुम सब मृत्य्शैया पर पड़े हो तो इसका मतलब जान ले की आप लड़े नहीं इसलिय मृतुशैया पर है और कारण गाँधी शिखंडी है. तो मित्रो जो इस व्यवस्था के पालक है वोही हिन्दू राष्ट्र के द्रोही ही. क्या कहेना है आपका ?

3 comments:

  1. Hello Blogger Friend,

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  2. Gud article. And you clarified 2 important points to me 1. BJP is our way, not the destination.
    2. We need to fight, with love, to our own surroundings.

    Thanks for keep writing, I wish that you continue write on this topic.

    -Shyam

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