Monday, February 20, 2012

नरेंद्र भाई मोदी - एक भूल जो हो न जाये !!!!!!!!!!!!!!!!!



खैर हमने कभी भी मुद्दों के बहार नहीं लिखा और न ही लिखना चाहते और व्यक्ति पर तो कभी भी नहीं परन्तु. कभी कभी ऐसा होता है की व्यक्ति मुद्दों से भी बड़ा बन जाता है. यह भी सत्य है की कोई भी व्यक्ति कुछ काल खंड तक ही ताकतवर बना रहता है और उसके बाद उसमे क्षरण आ ही जाता है. परन्तु उसका व्यक्तित्व दुसरो के लिए हमेशा प्रेरणा और उस व्यक्ति के लिए उसका व्यक्तित्व एक इतिहास बन जाता है. 


निश्चित रूप से नरेंद्र भाई मोदी जो वर्तमान में गुजरात के मुख्मंत्री है वो एक जिन्दा मिसाल है "हिंदुत्व के प्रहरियो" के लिए, एक शख्स जो अकेला ही अपने दम पर हिंदुत्व के विरोधियो के सामने न केवल डटा रहा बल्कि मुहं तोड़ जवाब भी देता है. यह एक शख्स जिसने भारतीय इतिहास के अब तक के सबसे बड़ी दुरभिसंधि हिंदुत्व के दुश्मनों कांग्रेस और वामपंथियो के सत्ता में रहेते विरोध की परकाष्ठा देखी और सहन की है. उसका एक वीर की भांति मुकाबला भी किया है. यह मुकाबला किसी भी तरह छत्रपति शिवाजी और राणा सांगा से कम न था और आज भी यह हिन्दू वीर अपनी उर्जा, शक्ति, ओज से भारत और हिन्दू विरोधी शक्तिओ के सामने एक चट्टान की भांति खड़ा है. जिसको हर भारतीय और हिन्दू को गर्व हो सकता है. श्री नरेंद्र भाई मोदी हमेशा भारतीय राजनीति में एक ध्रुव तारे की तरह रहेंगे और आने वाली नस्लों के लिए प्रेरणा के स्रोत होंगे.


परन्तु इस सबके बावजूद कुछ व्यक्तिवादी समस्या हिंदुत्व की एक जुटता में हमेशा बाधा रही है. यह बहुत बड़ी विजय है हिंदुत्व राष्ट्रवाद की सभी सामान विचारधारा के लोग एक मंच पर आये. हम हिन्दू वर्षो से आपसी मतभेद नहीं भुला पाए. जरा सी बात पर बड़े बड़े इरादे धुल धूसरित होगये. क्या मुगलों और तुर्कों के सामने हम अपने मतभेद भुला सके ? नहीं! और यह आज भी जारी है. मैं नहीं कहेता की नरेंद्र भाई मोदी में किसी भी प्रकार का अहंकार है परन्तु कोई भी राजा दुसरो को सजा देने के लिए अपने ही सैनिको का सर कलम नहीं करवा सकता. बहुत ही छोटी से बात पर यदि श्री नरेंद्र मोदी उप्र के चुनाव में केम्पेन नहीं करेंगे तो कद उनका ही छोटा होगा. बड़े व्यक्तित्व का बड़प्पन इसी में है की यदि अपनों से कोई गलती हुई भी है तो माफ़ कर देना ही चाहिए. आज इसी बात की सजा श्री गोविन्दाचार्य जी पा रहे है. मेरा तो अनुरोध होगा की जिस प्रकार से सुश्री बेहेन उमा जी आज बीजेपी में है उसी प्रकार बीजेपी से ही अध्यक्ष जी श्री गोविन्दचार्ये जी को बुलाकर बीजेपी में स्थान देकर उनको सम्मानित करे. इसी में सबका भला है और भारत की उन्नति है अन्यथा राजनीती करने के और भी बहुत मुद्दे है कम से कम इन क्षुद्र मुद्दों पर राजनीति करके अपनी ही शक्ति क्षीण करना किसी को भी शोभा नहीं देता. हमारे दादा जी कहा करते थे की "व्यक्ति अकेले न तो हँसता अच्छा लगता और न ही रोता".


श्री नरेंद्र भाई मोदी को उप्र चुनाव में जाकर विरोधियो का मानमर्दन करना ही चाहिए और देश को अपनी ओजता और प्रखरता से लाभान्वित करना चाहिए. देश के सबसे बड़े राज्य के चुनाव से अपने को दूर रखने के बहुत अच्छे परिणाम नहीं होंगे, यह एक घटना राजनैतिक विरोधियो को भरपूर आक्रमण करने का अवसर देगा. और राजनैतिक रूप से गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते है. यह और भी गंभीर होगा की जब हम गुजरात में इसी वर्ष चुनाव में हिन्दू और राष्ट्र विरोधियो को सबक सिखाने और २०१४ के चुनावों में अपनी दावेदारी मजबूत करने के अवसर को और भुनाएंगे. यह सब आपके नेत्रत्व में हो यह एक आम भारतीय की अपेक्षा है.


जय भारत जय भारती 

4 comments:

  1. बढिया लेख. बधाई स्वीकारें.

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  2. bhai bohot achcha likha hai ...magar ek baat ki or apka dhyaan dilana chahunga .
    Agr Modi ji UP mein aate aur bhashan dete to yahaan k muslims ko Samaajwadi party ki or jaane se koi nahi rok skta tha. Lekin modi ji nahi aaye aur voting mein muslims SP,Congress, Peace party aur BSP mein divide ho gye.
    Iska sbse zyada nuksaan Mulayam singh ko hoga aur faayda BJP ko milega kyuki hindu mein sawarn vote aur OBC vote BJP ko hi ja rhe hain is baar.
    Modi ji ko election se door rakhna ek planning k tehet hua hai kyuki Gadkari ji nahi chahte the k modi ji ki wajah se musalmaano k vote kisi ek particular party ko jaayen.

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